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अशोक प्रकृति के अधिक निकट था......

अशोक एक महान कल्याणकारी शासक था । गिरनार अभिलेख के अनुसार उसने पशु पक्षियों के लिए भी चिकित्सालयों का निर्माण करवाया । अपने पहले शिलालेख में वह कहता है की मैंने पशु बलि पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है , निश्चित ही पशुओं और पक्षियों की हत्या पर अंकुश लगा होगा । शान्ति और अहिंसा की निति के अनुसरण का यह प्राचीनतम उदाहरण मिलता है । प्राचीनकाल में ऐसी सोच किसी और शासक की नही हो सकी । अशोक द्वारा दिखाए गए मार्ग पर आज की सरकारें चलने की कोशिश कर रही है । भारतीय संबिधान में भी अशोक की शिक्षाओं को स्थान दिया गया है तथा सत्यमेव जयते को राष्ट्रीय कथन माना गया है । अशोक द्वारा बताये हुए रास्ते का ही अनुसरण कर महात्मा गाँधी ने सत्य व अहिंसा को आजादी की लड़ाई में प्रमुख हथियार बनाया ।
१३ वें शिलालेख में कलिंग युद्ध का वर्णन है जिसके बाद अशोक ने युद्ध विजय को त्याग कर धम्म विजय की यात्रा शुरू की । न केवल मानव मात्र के कल्याण के लिए सोचा बल्कि पशु पक्षियों के कल्याण के सम्बन्ध में भी सोचा । ऐसा लगता है की अशोक प्रकृति के अधिक निकट था । आज हम केवल मानवाधिकार की बात करते है और पशु अधिकारों की नही जबकि अशोक ने उस समय ही पशु अधिकारों के सम्बन्ध में कानून का निर्माण किया था । आज अशोक इसलिए महान है की उसने मानव कल्याण के लिए जो कुछ सोचा उसपर पुरे मनोयोग से काम किया ।

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