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सच्चे vachan

निष्ठुर निर्दयी कपटी बन कर॥
धरती पर करते पाप क्यो इतना॥
मानव जीवन सरल नही है॥
इसको खीचो बाधे उतना॥

उपकार करोगे उत्तम जीवन की॥
लय तुम्हे मिल जायेगी॥
तेरी करनी धरनी की गाथा॥
उत्तम प्राकृत गाये गी॥

असहाय और निर्दोष व्यक्ति पर॥
कभी न अत्याचार करो॥
हो सके तो मोटा छोटा॥
थोडा बहुत उपकार करो॥

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