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अरी !
युक्ति तू शाश्वत ,
मोहिनी रूप फिर धर ले ।अमृत देवो को देकर,
मोहित असुरो को कर ले॥बुद्धि कभी,
चातुर्य कभी,
विधि तू कौशल्य निपुणता।युग-
तपन शांत करने को,
है कैसी आज विवशता ॥कल्याणी शक्ति अमर ते ,
निज आशा वि्स्तृत कर दो,
वातायन स्वस्ति विखेरे ,
महिमामय करुणा वर दो॥डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल '
राही'
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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर