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‘नीले जहर’ के शिकंजे में किशोर

कोटा. घर-घर में इंटरनेट पहुंचने से मंदे पड़े साइबर कैफे के बिजनेस को अब कैफे संचालक कम उम्र व नादान किशोरों को पोर्र्नो साइट के जरिए अश्लील फिल्में परोसकर मोटी कमाई कर रहे हैं। उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं कि इस ‘नीले जहर’ से मासूमों के मन-मस्तिष्क पर क्या बुरे प्रभाव पड़ेंगे। हाल ही में विज्ञाननगर इलाके में छात्रों को पोर्न साइट दिखाते एक साइबर कैफे संचालक को पकड़ा गया था। शहर में यह पहला मामला नहीं है।

शहर में करीब तीन सौ साइबर कैफे हैं, जिनमें कई साइबर कैफे केवल पोर्न साइट दिखाने के धंधे में मशगूल हैं। जहां इंटरनेट के उपयोग के लिए साइबर कैफे में दस रुपए प्रतिघंटा शुल्क वसूला जाता है, वहीं पोर्न साइट दिखाने के लिए कैफे संचालकों द्वारा मुंहमांगी कीमत वसूल की जा रही है। जो पचास रुपए से लेकर सौ रुपए तक प्रति व्यक्ति होती है।


इन कैफे के ज्यादातर ग्राहक कोचिंग विद्यार्थी हैं, जो अपने घर से तो डॉक्टर, इंजीनियर बनने का सपना लेकर आए, लेकिन कैफे संचालकों ने उन्हें इस ‘नीले जहर’ का चस्का ऐसा लगाया कि रात-रातभर पोर्न साइट देखते रहते हैं। नए कोटा क्षेत्र के जवाहरनगर, तलवंडी, विज्ञाननगर, दादाबाड़ी क्षेत्र में स्थित कई कैफे सुबह 4-5 बजे तक खुलते हैं। रात को 10 बजे बाद इनमें पोर्न साइट दिखाई जाती है। पुलिस ने जब एक-दो बार छापा मारा, तो अब ये संचालक बच्चों को पैदल बुलवाते हैं और कैफे में लेने के बाद बाहर से शटर बंद कर देते हैं।

पहले भी पड़ चुके हैं छापे
शहर में इससे पहले भी कई बार अश्लीलता परोसते हुए साइबर कैफे पर छापे पड़ चुके हैं। तलवंडी क्षेत्र में तो एक कैफे में बाकायदा कम्प्यूटर व टीवी लगाकर अश्लील फिल्में दिखाई जा रही थीं। पुलिस ने छापा मारा और कैफे को ही सीज कर दिया। शॉपिंग सेंटर स्थित एक कैफे में तीन माह पूर्व ही छापा मारा गया था।

‘कैफे में पोर्न साइट दिखाने पर रोक लगाने की बजाय सरकार प्रोक्सी को ही ब्लॉक कराए। जब तक प्रोक्सी से पोर्न साइट आती रहेंगी, इन पर रोक नहीं लग सकती। सरकार खुद इस दिशा में आज तक कोई कदम नहीं उठा पाई। बीएसएनएल सरकार का उपक्रम है। उससे भी नेट यूज करते समय पहले पोर्न व ट्रिपल एक्स साइट खुलती है। जब बीएसएनएल ही इस पर रोक नहीं लगा सका तो घर-घर में नेट पर उपलब्ध पोर्न साइट को कैसे रोका जा सकता है। पुलिस को इसके साथ ही शहर में ठेलों व दुकानों पर उपलब्ध अश्लील सीडी पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए।’

पुनीत माहेश्वरी, अध्यक्ष, साइबर कैफे एसोसिएशन

शिकायतों के बाद अश्लीलता परोसने वाले कैफे संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में नए कोटा क्षेत्र के कैफे संचालकों की बैठक ली गई है। उन्हें साइबर एक्ट, 2007 के बारे में जानकारी देकर इसके पालन की हिदायत देकर तीन दिन की मोहलत दी गई है। तीन दिन बाद साइबर कैफे पर आकस्मिक निरीक्षण किया जाएगा। और गड़बड़ी मिलने पर कैफे को सीज कर संचालक के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।’

अंशुमान सिंह भौमिया, एएसपी

अश्लील फिल्में देखने से बच्चों के मन व मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उसके सोचने की दिशा बदल जाती है। बच्च जिस उद्देश्य को लेकर कोटा आया है उससे भटक जाता है। यह एक तरह का नशा है, जिसके परिणामस्वरूप युवा पीढी कुंठित होती जा रही है। वह हमेशा बुरी कल्पनाओं में जीता है। इसके लिए जितना जिम्मेदार पुलिस व प्रशासन है, उतने ही जिम्मेदार हम व समाज भी है। बच्चों के लिए कोई सोशल नेटवर्क नहीं है।

पीएन दुबे, व्याख्याता, समाजशास्त्र

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