हमारा समाज़ व स्त्री By shyam gupta June 28, 2009 आखिर क्योंसमाज़ स्त्री को हमेशा पिछले पायदान पर ही चाहता है??युक्ति-युक्ति पूर्ण आलेख पडिये ,देवेन्द्र साहू का--ओर सोचिये समाझिये---- Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments AnjuGandhiJune 28, 2009 at 11:43 AMnaari teri yehi kahanihamesha kari mard ne apni manmaniReplyDeleteRepliesReply shyam guptaJune 28, 2009 at 5:34 PMकुछ तुम करो , कुछ हम करें जानी।कब तक रहेगी आखिर ये मनमानी।यदि खप्पर-त्रिशूल ले बने रणचन्डी,क्या न होगी पुरुष व दुनिया को हैरानी।ReplyDeleteRepliesReplyAdd commentLoad more... Post a Comment आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!! --- संजय सेन सागर
naari teri yehi kahani
ReplyDeletehamesha kari mard ne apni manmani
कुछ तुम करो , कुछ हम करें जानी।
ReplyDeleteकब तक रहेगी आखिर ये मनमानी।
यदि खप्पर-त्रिशूल ले बने रणचन्डी,
क्या न होगी पुरुष व दुनिया को हैरानी।