Skip to main content

चार साल की उम्र में मासिक धर्म !


राजकोट. महज साढ़े चार साल की उम्र में यहां एक मासूम बालिका को प्रकृति की अनूठी मार झेलनी पड़ रही है। इस नादान उम्र में शारीरिक विकास के बाद अब उसे मासिक धर्म की पीड़ा से भी गुजरना पड़ रहा है। बच्ची में आए इस असामयिक सयानेपन से उसके माता-पिता काफी चिंतित हैं। दुर्लभतम मामला: स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. यशुबहन शाह और डा. सोनल शाह इसे दुर्लभतम मामला बताते हुए कहती हैं कि ‘प्रिकोश्ॉस प्यूबर्टी’ नामक यह बीमारी बच्चों में समय पूर्व सयानापन ले आती है। अमूमन लड़कियों में यह बीमारी आठ-नौ वर्ष तक की उम्र में देखी जाती रही है। लेकिन, साढ़े चार साल की उम्र ऐसा होना वाकई चिंताजनक है। उन्होंने पीड़ित बालिका की जांच एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, पीडियट्रीशियन और गायनेकोलॉजिस्ट से कराने की जरूरत बताई है।


आगे पढ़ें के आगे यहाँ

Comments

  1. बहुत दुखद घटना है

    ReplyDelete
  2. Bahut jyada buri baat h.
    Bhart sarkar & rajya sarkar ko & chiktsa vibhag ko visesh abhiyan se sahayata kar ke iska ilaj kraye.

    ReplyDelete

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

चेतन आनंद/नेपाल-बवाल

समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा?                   नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...