Skip to main content

Loksangharsha: http://yaadonkaaaina.blogspot.com/2009/05/blog-post_2546.html#comments जवाब


श्रीमानजी ,
बड़े सम्मान के साथ कहना चाहूँगा की गाय घास खाकर दूध देती है यह सत्य लेकिन साँप दूध पीता है यह ब्रहाम्णवादी भ्रम है और असत्य हैइतिहास से कडुवाहट नही पैदा होती है सबक लिया जाता है ।श्री मुद्रारक्षस जी इस देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार है और इस देश के शुभचिन्तक है और जहाँ तक मेरी जानकारी है लेख के लेखक जाति व्यवस्था के तहत दलित नही है और न ही मै ही दलित हूँ लेकिन यह भी सत्य है की जिस थाली में कुत्ता और सुवर खा लिए वह थाली नापाक नही होती है लेकिन भारतीय समाज व्यवस्था में दलित किसी थाली में खा ले तो वह थाली फेक दी जाती रही है । यह विषय यथार्थ का विषय है और इस पर गंभीर चिंतन और मनन की जरुरत है क्योंकि पहले ब्रिटिश सम्रज्यवादियों ने इसी असंतोष का लाभ उठाया और देश गुलाम हुआ ब्रिटिश साम्राज्यवाद के एजेंट राजा , राजवाडे, महाराजा, जमींदार, तालुकदार, तथा अभिजात वर्ग के लोग थे और आज भी अमेरिकन साम्राज्यवाद इस देश को गुलाम बनाना चाहता है ।उसकी तरफदारी अभिजात्य वर्ग के ही लोग कर रहे है यह वही लोग है महात्मा गाँधी की हत्या,इंदिरा गाँधी की हत्या ,राजीव गाँधी की हत्या इन्ही तबको की सोच का परिणाम है जब कांग्रेस ने प्रिवी पर्सेज़ को जब्त किया था और बैंको का राष्ट्रियकरण किया था तब कांग्रेस के इन कदमो का विरोध भी वही अभिजात्य वर्ग के लोग कर रहे थे जो आज हिंदुत्व की पैरोकरी कर रहे है ।और विश्व आर्थिक मंदी के दौर में भारत आज अगर मजबूत है तो अपनी सार्वजानिक क्षेत्र की आर्थिक मजबूती के कारण है ।गोधरा से लेकर पूरे देश मेंभारतीय नागरिको का नरसंहार तथा सिखों का नरसंहार इसका स्पष्ट उदाहरण है हे शब्दों के सौदागरों भारतीय संविधान आज प्रमुख है या इस संविधान को बदल कर हिंदुत्व का शासन लागू किया जाए ।हिंदुत्व का शासन लागू होने का मतलब उस समाज व देश में दलितों कोई मतलब नही होगा और पिछ्डी जातियों को आज भी सवर्ण चारपाई पर बैठने नही देते है ।यह समाज आप को चाहिए । भारत एक बहुधर्मीय ,बहुजातीय ,धर्मनिरपेक्ष देश है हमारी सबकी भलाई इसी में की इस स्वरूप को बनाये और बचे रखा जाए ।अन्यथा न लीजियेगा स्नेह बनाये रखियेगा ।
सादर

सुमन

loksangharsha.blogspot.com

Comments

  1. व्यर्थ की बहस है. ,ब्राह्मण का अर्थ है जो ब्रह्म का अनुसरण करे , ब्रह्मचर्य (ईश्वरीय गुणॊं पर चलना ) पालन करे ।कोई नहीं है आज ब्राह्मण, सब ही शूद्र गुण अपनाये हुए हैं।

    ReplyDelete

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

जूजू के पीछे के रियल चेहरे

हिन्दुस्तान का दर्द आज आपको बताने जा रहा है उन कलाकारों के बारे में जिनके काम की बदोलत ''जूजू'' ने सभी के दिलों मे जगह बना ली है..तो जानिए इन कलाकारों के बारे में और आपको यह जानकारी कैसी लगी अपनी राय से अबगत जरुर कराएँ बहुत ही क्यूट, अलग, और मज़ेदार से दिखने वाले जूजू असल में इंसान ही हैं, बस उनको जूजू के कॉस्टयूम पहना दिए गए है। पर ये करना इतना आसान नहीं था, जिस तरह का कॉस्टयूम और एक्ट शूट किए जाने थे उनमे हर मुमकिन कला और रचनात्मकता का प्रयोग किया जाना था। जूजू के पीछे के असल कलाकार कौन है आइये जानते हैं - प्रार्थना सुनिए विज्ञापन- इस विज्ञापन दो जूजू एक पेड़ से लटके दिखाए गए हैं और नीचे एक खाई है। उनमे से एक गिर जाता है और दूसरा अपना फोन निकलकर एक प्रार्थना सुनाता है जिस से की उस के दोस्त की आत्मा को शांति मिल सके। इस विज्ञापन में हैं ये दो कलाकार- रोमिंग विज्ञापन- इस में एक जूजू अपनी गर्लफ्रेंड को खुश करने के लिए फ़ोन पर उससे बातें करता रहता है चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो। इस विज्ञापन में सबसे बड़ी चुनौती थी एफ्फिल टावर और पिरा...