समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा? नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...
भाई जी देश या विश्व की राजनीति तो ऐसे ही चलती आई है और ऐसे ही चलेगी. हम बहुत बडी-बडी बाते करते है, लिखना एक कला है और इसमे बहुत लोग पारंगत होते हैँ, किंतु जो लिखते हैँ उसे कितने लोग अपने जीवन मैँ उतारते है, यह महत्वपूर्ण है. भाषण देना, ब्लोगिंग करना एक अलग बात है और ईमानदारी, सत्य और देश व समाज को प्राथमिकता देकर अपने व परिवार से जुडे निर्णय करना एक अलग बात है. आलोचना करना जितना सरल है, उतना ही कठिन है अपने आचरण मे उसको ढालना. जिस प्रकार अपने स्वार्थ के लिये ईश्वर का नाम सभी लेते है किंतु वास्तव मे ईश्वर को मानने वाला, जो उस पर पूर्ण विश्वाश करता हो और उसके अनुरूप आचरण भी हो मुझे तो आज तक कोई मिला नहीँ, अतः मेरा विचार है कि हमे आलोचना से बचकर सकारात्मक कुछ करना चाहिये. हम दुनिया को नही बदल सकते, किंतु अपने आप को बदल सकते है किंतु यह ब्लोगिंग की तरह सरल नही है. अतः आओ अपने से शुरूआत करेँ.
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