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हिन्दुस्तान का दर्द से जुड़ने का मौका,सभी बुद्धिजीवी लेखक आमंत्रित है


देश की राजनीति को लग चुका है अभिशाप ,गुरु कर रहे है शिष्यों के साथ पाप,अस्पतालों मे हो रही है बच्चों की हेराफेरी,पुलिस को जीने के लिए जरुरी है घूसखोरी,खेलो मे खिलाडियों को रास आ रही है मैच फिक्सिंग , धार्मिक पत्रों के कलाकारों मे बढ रही है किसिंग !जनता से ख़रीदे जा रहे है वोट , संसद मे भी वोट के बदले नोट !देश के इसी तरह के गर्मागर्म मुद्दों पर आधारित ''हिन्दुस्तान का दर्द'' आपको मौका देता है अपनी बात कहने का! तो खामोश मत रहिये अपनी बात कहिये.....अगर आप भी इस ब्लॉग पर लिखना चाहते है तो अपना ईमेल अकाउंट आपके फ़ोन नंबर और पते के साथ हमें-mr.sanjaysagar@gmail.com पर भेजें और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें-9907048438


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Comments

  1. भाई जी देश या विश्व की राजनीति तो ऐसे ही चलती आई है और ऐसे ही चलेगी. हम बहुत बडी-बडी बाते करते है, लिखना एक कला है और इसमे बहुत लोग पारंगत होते हैँ, किंतु जो लिखते हैँ उसे कितने लोग अपने जीवन मैँ उतारते है, यह महत्वपूर्ण है. भाषण देना, ब्लोगिंग करना एक अलग बात है और ईमानदारी, सत्य और देश व समाज को प्राथमिकता देकर अपने व परिवार से जुडे निर्णय करना एक अलग बात है. आलोचना करना जितना सरल है, उतना ही कठिन है अपने आचरण मे उसको ढालना. जिस प्रकार अपने स्वार्थ के लिये ईश्वर का नाम सभी लेते है किंतु वास्तव मे ईश्वर को मानने वाला, जो उस पर पूर्ण विश्वाश करता हो और उसके अनुरूप आचरण भी हो मुझे तो आज तक कोई मिला नहीँ, अतः मेरा विचार है कि हमे आलोचना से बचकर सकारात्मक कुछ करना चाहिये. हम दुनिया को नही बदल सकते, किंतु अपने आप को बदल सकते है किंतु यह ब्लोगिंग की तरह सरल नही है. अतः आओ अपने से शुरूआत करेँ.

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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