Skip to main content

टयूबवैलों के भरोसे विश्व प्राकृतिक धरोहर - घना पक्षी विहार


राजीव शर्मा,भरतपुर

जल ही जीवन है,जल है तो कल है, जैसी बातें दिनों दिन अब आम आदमी के सामने यक्ष प्रश्न बन कर सामने आ रही है । गर्मी के दिनों में इसकी किल्लत के चलते इंसान तो चक्का जाम , मटका फोड प्रदर्शन कर प्रशासन के सामने अपनी मॉग को पूरी करने के लिए मशक्कत करता दिखाई पड रहा है ।मगर जल केवल इंसानों के लिए ही जीवन नहीं है और इसके न होने से इंसानों का ही कल असुरक्षित होगा ऐसा भी नहीं है। इसका उतना ही संबंध जल के जीवों , आसमान के परिंदों के साथ जंगली जानवरों के लिए भी है ,जो किसी के पास जाकर अपनी मॉग नहीं रख सकते तो क्या इंसान इतना मतलबी हो गया है कि वो प्रकृति के इन अनुपम उपहारों की चिंता ही करना छोडता चला जा रहा है या फिर उसने, इनके लिए पानी की व्यवस्था को भी अपनी राजनीति की एक सीढी मात्र बना लिया है।इतना ही नहीं आम आदमी ने भी अपने घर के आस पास के पेडों पर हमेशा की तरह पानी के परींडे लगाना बंद कर दिया है जिनसे पक्षी अपनी प्यास बुझा लिया करते थे।

राजस्थान को अन्रर्तराश्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला केवलादेव घना पक्षी विहार अब अपने अस्तित्व के लिए संधर्ष करता नजर आ रहा है इसके पीछे का कारण है पानी, जिस पर होने वाली राजनीति ने पक्षियों का स्वर्ग कही जाने वाली इस प्राकृतिक संपदा के समक्ष गम्भीर संकट खडा कर दिया है ।जिसके लिए अब टयूबवैलों का सहारा लिया जा रहा है ।क्या हजारों पक्षियों ,जंगली और पानी के जीवों के आश्रय बने इस विशाल क्षेत्र को ऐसे अल्प संसाधनों से पुर्नजीवन दिया जा सकता हैं।किसी समय पर 400 पक्षी प्रजातियों को आशियाना देने वाले इस पक्षी विहार में आज बमुश्किल 50 प्रजाति ही दिखाई पडती है जिनमें अधिकांश देशी ही है। ।इस अभ्यारण्य में इस समय लगभग पॉच हजार पक्षी है जिनमें ईंग्रेट,बुड पैकर,ग्रीन पीजन,पैराकीट,उल्लू,हार्नबिल,किंग फिशर,जैकाना,सनवर्ड,ब्लैक नेक स्टार्कं,इंडियन सारस प्रमुख है।इनमें जलकौवे,सारस,लकबक बगुले,जलसिघे और कछुऐ जो जल के जीव है के लिए परेशानियॉ कहीं बहुत अधिक बढ गई हैं। सभी झीलों का पानी लगभग सूख चुका है जमीन में दरारें दिखाई देने लग गई है ऐसे में केवल मानसून की अच्छी बारिश से ही उम्मीद की जा रही है।

इस पक्षी विहार की पहचान साईबेरिया से चलकर आने वाले सारसों के कारण थी जो अब बशोZ से यहॉ नही आ रहे है ।बर्ष 2002 से इन पक्षियों ने यहॉ आना बंद क्या किया, पक्षी विहार के लिए अपशकुन के दिन आरम्भ हो गये, और फिर 2004 से इन्द्र देवता ने भी अपना कोप भाजन इस क्षेत्र को बना लिया जिसके चलते पानी का एक गम्भीर संकट यहॉ खडा हो गया है।

आज घने को तकनीकी रूप से दुनिया के सामने रखने के लिए वेब की दुनिया से जोडे जाने की तैयारिया तो चल रहीं है मगर उसको बचाने के लिए आवश्यक पानी की व्यवस्था करने हेतू स्थायी और सार्थक प्रयास कहीं होते नजर नहीं आ रहे है।आम तौर पर घने को मई जून के महीनों में बंद कर दिया जाता रहा है मगर इस बार कुछ तथाकथित घना प्रेमियों ने धरने प्रदर्शनों की नौटंकी कर उसे इन दिनों में भी खुला रखने के सरकारी आदेश मिलने के बाद खुशी के इजहार करते अपने फोटो छपवा लिऐ है मगर पानी की समस्या को लेकर कोई सुगबुगाहट कहीं दिखाई दी हो ऐसा नहीं है।

घने की झीलों के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था गम्भीर नदी से होती रही है, जिसे रोककर करौली जिले में पॉच नदियों का संगम कर पॉचना बॉध बना दिया गया ,उसके बाद इस पक्षी विहार के लिए पानी का संकट खडा हो गया ।पॉचना से चलकर भरतपुर पहुंचने वाले पानी पर राजनीति की ऐसी काली छाया पडी की इस राश्ट्रीय धरोहर के अस्तित्व पर ही संकट खडा होने जा रहा है क्योंकि पानी के बिना प्रकृति और पक्षी अपने जीवन के लिए संघर्ष करते हुए यहॉ बहुत दिनों तक बने रहेगें इस बात की उम्मीद कम ही की जा सकती है ।दूसरी ओर यहॉ पर्यटकों के लिए भी स्तरीय सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है ।

कभी देशी विदेशी पक्षियों के मधुर कलरव से गुंजायमान रहने वाले इस पक्षी अभ्यारण्य की स्थिति अब धीरे धीरे बदतर होती चली जा रही है राजनीति के धुरंधर चुनावों के वक्त भले ही भरतपुर को पानी दिलाने की बात कहते हो मगर उसमें भी इस पक्षी विहार की कहीं कोई चर्चा सुनाई नही देती है ।आम आदमी की उदासीनता राजनेताओं से कही अधिक है वो भी नहीं चाहते कि इस पहचान के साथ जिले और प्रदेश का नाम जुडा रहे, उनका मानना है कि जब भरतपुर से बडे बडे उधोग धन्धे और कम्पनियॉ रूखसत कर गई तो इस पहचान के साथ जुडे रहने से क्या होना है ।

अब जबकि प्रदेश और केन्द्र में कांग्रेस की सरकार है और बहुत दिनों बाद कांग्रेस प्रत्याशी भरतपुर से जीत कर संसद पहुंचा है ,जो जलदाय विभाग के उच्च पद से ही सेवानिवृत है तथा जिसका संबंध भरतपुर को चंबल का पानी पहुंचाने के लिए गत कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना से रहा है । अब इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि इस अभ्यारण्य के लिए पानी की स्थायी व्यवस्था के साथ इसकी बेहतरी के लिए कुछ किया जा सकेगा।इस संदर्भ में एक और बात महत्वपूर्ण है कि कांग्रेस के युवराज राहुल गॉधी चुनाव प्रचार के दौरान भरतपुर आने पर अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए सर्दियों में एक बार फिर से घना घूमने का वायदा कर गऐ है लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह हो जाती है कि आज 6 टयूबैलों के भरोसे खडी ये अनमोल धरोहर और इसकी अमानत शोरगुल करते सुन्दर विहग तब तक यहॉ रूक पाऐगें या फिर अपने लिए और किसी बेहतर आशियाने की तलाश में यहॉ से दूर कहीं के लिए उडान भर जाऐगें ।आज भरतपुर जिले के कस्बों और गॉवों में रोजाना पीने के पानी के लिए सड़कों पर खुले आम प्रदर्शन हो रहे है मगर प्रकृति के सुन्दर उपहार कहे जाने वाले इन मूक पक्षियों और जानवरों के लिए कहीं से कोई आवाज उठती नजर नहीं आ रहीं है ये मानवीय संवेदनाओं के सिकुडते स्वरूप को साकार करती कहानी है जिसकी इबारत इस पक्षी विहार के लिए आने वाले दिनों का अच्छा संकेत नहीं दे रही हैं।



आगे पढ़ें के आगे यहाँ

Comments

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

Warts, Moles and Skin Tags - Can They Develop Into Cancer?

Skin tags pose no real danger. They will not develop into a cancerous growth. However sometimes they may be irritating especially if they are found around the collar. You may even decide to remove a skin tag for cosmetic reasons. When one considers warts, particular attention needs to be taken in the case of genital warts, since these may be transmitted to others. Moreover sometimes genital warts may develop into a cancerous growth. Therefore if you have genital warts you should consult your physician right away. Moles may develop into a cancerous growth. It is therefore important to take appropriate care of any changes that can occur to any mole. If you have many moles on you body it is not a bad idea to have regular checks. Take particular attention after summer because the sun rays may make a mole develop into melanoma or cancer of the skin. Consider any changes that you notice to any of your moles. Specifically you must consult your physician if a mole changes it'...

जूजू के पीछे के रियल चेहरे

हिन्दुस्तान का दर्द आज आपको बताने जा रहा है उन कलाकारों के बारे में जिनके काम की बदोलत ''जूजू'' ने सभी के दिलों मे जगह बना ली है..तो जानिए इन कलाकारों के बारे में और आपको यह जानकारी कैसी लगी अपनी राय से अबगत जरुर कराएँ बहुत ही क्यूट, अलग, और मज़ेदार से दिखने वाले जूजू असल में इंसान ही हैं, बस उनको जूजू के कॉस्टयूम पहना दिए गए है। पर ये करना इतना आसान नहीं था, जिस तरह का कॉस्टयूम और एक्ट शूट किए जाने थे उनमे हर मुमकिन कला और रचनात्मकता का प्रयोग किया जाना था। जूजू के पीछे के असल कलाकार कौन है आइये जानते हैं - प्रार्थना सुनिए विज्ञापन- इस विज्ञापन दो जूजू एक पेड़ से लटके दिखाए गए हैं और नीचे एक खाई है। उनमे से एक गिर जाता है और दूसरा अपना फोन निकलकर एक प्रार्थना सुनाता है जिस से की उस के दोस्त की आत्मा को शांति मिल सके। इस विज्ञापन में हैं ये दो कलाकार- रोमिंग विज्ञापन- इस में एक जूजू अपनी गर्लफ्रेंड को खुश करने के लिए फ़ोन पर उससे बातें करता रहता है चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो। इस विज्ञापन में सबसे बड़ी चुनौती थी एफ्फिल टावर और पिरा...