अभिप्राय By आस्था May 27, 2009 तुम जीते हो एक - एक पल में कई - कई जिन्दगी और हम नहीं जी पाए पूरी जिन्दगी में एक पल भी इसका अभिप्राय महज यही नहीं है कि तुम्हें जीना आता है और हमें नहीं बल्कि यह समेटे हुए है स्वयं में और भी बहुत से निहितार्थ ............ । आरती "आस्था " Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments News4NationMay 29, 2009 at 11:03 AMबहुत ही खूब लिखा हैReplyDeleteRepliesReplyNews4NationMay 29, 2009 at 11:03 AMबहुत ही खूब लिखा हैReplyDeleteRepliesReplyAdd commentLoad more... Post a Comment आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!! --- संजय सेन सागर
बहुत ही खूब लिखा है
ReplyDeleteबहुत ही खूब लिखा है
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