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...और जब अभिनेता से बन गए नेता

भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमा से जुड़े कई स्टारों ने प्रवेश किया है। चाहे वह टालीवुड से संबंध रखते हो या फिर मायानगरी के बॉलीवुड जगत से। इस बार के भी चुनाव में कई सितारों की किस्मत दांव पर है। कुछ ऐसे हैं जो अपनी पार्टी बनाकर देश पर छाना चाहते हैं वहीं कुछ ऐसे हैं जो दूसरी पार्टियों के चुनाव चिंह पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे ही कलाकारों के राजनीति में समय-समय पर आने वाले कालखंड और उनकी सफलता का एक विश्लेषण...
मुख्यमंत्री जयललिताः 24 फरवरी 1948 को कर्नाटका के मैसूर में जन्मी जयललिता ने अपना फिल्मी करियर तमिल फिल्म इंडस्ट्रीज से शुरुआत की। उन्होंने तमिल, इंग्लिश और हिंदी फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र के साथ अभिनेत्री का काम कर चुकी हैं। जयललिता तमिल फिल्म में पहली अभिनेत्री थी जिन्होंने स्कर्ट पहना था। 1961 से फिल्मी दुनिया में आने वाली जयललिता का आखिरी फिल्म 1980 में बनी।
राजनीतिक करियर - जयललिता ने सन 1981 में राजनीतिक सियासत में कदम रखा। उन्होंने 1981 में एआईएडीएमके पार्टी में शामिल हुई और सन 1988 में राज्यसभा की सदस्य भी चुनी गई। एम.जी.रामचन्द्रन की राजनीतिक विरासत को बढ़ाने में उनकी शिष्या जयललिता का अहम योगदान माना जाता है। कहा जाता है कि जयललिता ने राजनीति का शुरूआती पाठ रामचन्द्रन से ही सीखा था। 1991 में पहली बार कांग्रेस के साथ गठबंधन कर जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं।
एम. करुणानिधी - 1957 फिल्मी पठकथा से राजनीतिक पठकथा तक का सफर तय करने वाले करूणानिधी का जन्म 3 जून 1924 हुआ, उनमें पढ़ने लिखने का गुण हमेशा से रहा और 20 साल की उम्र में जब उन्होंने राजकुमारी नामक फिल्म की पठकथा लिखी थी उस समय तमिल सिनेमा में तहलका ही मच गया था।
करुणानिधी ने कई फिल्मों की पठकथा के साथ-साथ ढेर सारी बेहतरीन किताबें और स्टेजप्ले में भी अपना अमूल्य योगदान दिया।
पहली बार करुणानिधी ने डीएमके पार्टी के उम्मीदवार के रुप में चुनावी रणभूमि में अपना भाग्य आजमाया था। इसके बाद इनकी राजनीतिक रेल चलती ही गई और आज भी उसी गति से चल रही है।
पहली बार करुणानिधी सन 1969 में तमिलनाडु के सीएम पद पर विराजमान हुए और तब से अब तक कुल पांच बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
नंदामुरी तारक रामा राव (एन.टी. रामाराव) - आंध्र प्रदेश के नीमाकुरू में 28 मई 1923 को जन्में एन.टी. रामाराव का शुरूआती जीवन फिल्म लाइन से जुड़ा रहा। वे धार्मिक फिल्मों में काम के साथ-साथ फिल्म निर्माता, निर्देशक और एक सफल राजनीतिज्ञ भी रहे।
उन्होंने धार्मिक फिल्मों में खासकर राम, कृष्ण, रावण और विष्णु की भूमिका में अपना योगदान दिए। रामाराव को पद्म सम्मान से सम्मानित भी किया जा चुका है। एनटीआर ने 1982 में तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) की स्थापना की। पार्टी के स्थापना के नौ महीने के अंदर ही टीडीपी राज्य में सत्ता में आई उस समय कांग्रेस को हराकर रामाराव की पार्टी सत्ता में काबिज हुई थी।
विजयाशांतीः 24 जून 1964 को आंध्र प्रदेश में जन्मी विजयाशांती ने सात भाषाओं में करीब 185 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं। तेलगु, तमिल, कन्नड, मलयालम और हिंदी फिल्मों में उनका प्रदर्शन जोरदार रहा। भारतीय सिनेमा में उन्हें द लेडी सुपरस्टार और द एक्सन क्वीन का खिताब से भी नवाजा जा चुका है।
फिल्मी करियर के बाद विजयाशांती ने सन् 1997 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं बाद में उन्होंने अपनी एक पार्टी बनाई जिसका नाम ताली तेलंगाना था। लेकिन यह पार्टी ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और अंततः यह पार्टी विलय टीआरएस में हुआ।
चिरंजीवीः तेलगु फिल्म अभिनेता चिरंजीवी ने अपनी पार्टी प्रजाराज्यम बनाकर द. भारत की राजनीति में तहलका मचा दिया है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जिस तरह से उनकी पार्टी का प्रचार-प्रसार हो रहा है उसे देखकर यही लगता है कि प्रजाराज्यम द. भारत की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकती है।
राज बब्बरः 23 जून 1952 को आगरा में जन्में राज बब्बर का फिल्मी करियर तो शानदार रहा ही अब उनका राजनीतिक करियर भी पूरे शबाब पर है।
राजबब्बर ने हिंदी फिल्मों में हर तरह के किरदार निभा चुके हैं। राममनोहर लोहिया से प्रभावित राजबब्बर समाजवादी पार्टी की तरफ से एक बार विधायक रह चुके हैं जबकि दो बार एम पी चुने गए हैं। अभी पिछले साल 5 अक्टूबर 08 को राजबब्बर की समाजवादी पार्टी से अंदरूनी दरार हो जाने के बाद वे कांग्रेस का दामन थाम लिए और इस बार कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में 15वी लोकसभा चुनाव आगरा से लड़ रहे हैं।
जयाप्रदाः 3 अप्रेल 1962 को पैदा हुई जयाप्रदा ने भी अपनी फिल्मी करियर की शुरूआत सन 1979 में शुरू की थी। जया ने हिंदी फिल्म सरगस से फिल्मी पारी शुरू की थी। जयाप्रदा ने फिल्मी करियर के बाद राजनीतिक करियर में अपना भाग्य आजमाना चाहा और सबसे पहले तेलगुदेशम पार्टी और उसके बाद टीडीपी और अंत में समाजवादी पार्टी में शामिल हुई।
सपा ने सन 2004 को रामपुर सीट से जयाप्रदा को चुनावी मैदान में उतारा और यहां पर वे जीत भी गई और इस बार भी वे सपा उम्मीदवार के रूप में रामपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं।
सुनील दत्तः 6 जून 1928 को झेलम (पाकिस्तान) में जन्मे स्वर्गीय सुनील दत्त ने एक रेडियो एनाउंसर से अपनी पारी की शुरूआत की और बाद में सफलता की नई ऊंचाईयों पर पहुंच गए। उन्होंने 1955 में हिंदी फिल्म रेलवे प्लेटफॉर्म से फिल्मी पारी की शुरूआत की थी और सन 1957 में उनकी भूमिका फिल्म मदर इंडिया में जमकर सराहा गया था। इसके बाद सुनील दत्त फिल्म अभीनेत्री नरगिश के साथ शादी की थी।
फिल्मी करियर के बाद उन्होंने पोलिटिक्स में भी कूद पड़े और कांग्रेस का दामन थामा। सुनील दत्त को कांग्रेस शासन में कैबिनेट मिनिस्टर पद दिया गया था। हालांकि 25 मई 2005 में सुनील दत्त की मौत के बाद उनकी राजनीतिक कुर्सी को उनकी बेटी प्रिया द्त्त ने संभाला। प्रिया दत्त के राजनीतिक सफर के बाद अब सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त ने समाजवादी पार्टी में शामिल होकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत कर दी है।
अमिताभ बच्चनः बॉलीवुड के सुपरस्टार कहे जाने वाले बिग बी का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को यूपी के इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने हिंदी फिल्म सात हिंदूस्तानी से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की।
फिल्मों में काम के साथ राजनीति में भी भाग्य आजमाते हुए सन 1984 में लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में खड़े हुए और विपक्षी सुंदर लाल बहुगुणा को हराकर तहलका मचा दिया था हालांकि उनका राजनीतिक सफर इसके बाद समाप्त हो गया और उसके बाद फिर वे कभी राजनीति में में नहीं आए और फिर से फिल्मी दुनिया में रम गए। जानकारी के मुताबिक उनकी पत्नी जया बच्चन का राजनीति की तरफ रूझान कुछ ज्यादा ही है तभी तो वे मौजूदा राज्य सभा सदस्य हैं।
शत्रुघ्न सिंहाः बिहारी बाबू के नाम से विख्यात शत्रुघ्न सिन्हा का जन्म बिहार में 9 दिसंबर 1946 को हुआ था।
ढेर सारी हिंदी फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत बीजेपी का दामन थाम के किया। और 15वीं लोकसभा चुनाव में शत्रु बिहार के पटना साहिब से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
निष्कर्ष - टालीवुड और बॉलीवुड फिल्म कलाकारों के राजनैतिक जीवन को देखने के बाद हम पाते हैं कि टालीवुड के कलाकारों ने राजनीति में अपने दम पर जो मुकाम हासिल किया वैसा बॉलीवुड के कलाकार अभी तक नहीं कर पाए हैं।
एक तरफ करूणानिधी, जयललिता और एनटीआर जैसे कलाकारों ने राजनीति में खुद की पार्टी बनाई और सत्ता के सिंहासन के सिरमौर भी बने और इनका जनता में जबरदस्त क्रेज भी चला और आज भी इनकी बनाई पार्टियां क्षेत्रीय स्तर पर लोकप्रिय हैं। दूसरी तरफ बॉलीवुड के कलाकारों ने अपनी पार्टी न बनाकर दूसरी पार्टियों के लिए स्टार प्रचारक के रूप में नजर आते रहे हैं। वे एक संसदीय सीट के विजेता बनकर रह जाते हैं। बहुत हुआ तो उनका आकर्षण किसी पार्टी विशेष के लिए फायदेमंद रहता है लेकिन वो जादू नहीं दिखा था जैसा टालीवुड के कलाकारों का जनता में दिखता
है।
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