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जूता चल जायेगा..

नेता जी अपनी रैली में जा रहे थे तो नेतानी जी ने कहा अजी सुनते हो नेता जी ने कहा बोलो" क्या बात नेतानी जी नेता टीका लगाया ओउर उसके बाद बोली बुरा न मनो तो मई भी चली नेता जी बोले मईभी तो सोचा रहा रहा था लेकिन आज कल तो लोग जूता चप्पल चलाते है, इस लिए मई नही तुम्हे ले चल सकता नेतानी जी बोली तो क्या हुआ लोग मारने के लिए थोड़े चलाते है, वे तो जनता को दिखाने के लिए चलाते आज तक किसी नेता को जूता लगा तो नही आप जैसे बचे गे वैसे मई भी बच जाऊगी आख़िर में तो मैसाड़ी जिंदगी लोगो के वार से तो बचाती ही आ रही हूँ, मेरे जाने से आप की रैली में रौनक आ जायेगी ओउर लोग वोट भी देगे क्यो की अभी तक लोगो ने हमें देखा तक भी नही है, नेता जी बोले आप घर पर लोगो को देखो मै बाहर रैली में जा रहा हूँ, पता नही कब जूता चल जाए..

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हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

चेतन आनंद/नेपाल-बवाल

समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा?                   नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...