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ब्लॉग्गिंग करते है,तारीफ पसंद है पर गालियाँ सुनने की हिम्मत नहीं...

ब्लॉग्गिंग का नशा कुछ अलग सा नजर आ रहा है जब तारीफ मिलती है तो दिल खुश और जरा सी बुराई निकली गयी तो दिल टूट जाता है।कुछ दिनों से इसी तरह की कशमकश देखने को मिल रही है! जहा ना केवल असामाजिक तत्व लेखकों के प्रोत्साहन को गिरा रहे है बल्कि अपशब्दों का उपयोग कर रहे है जो हिंदी भाषा और साहित्य के लिए घातक है.अभी कुछ अच्छे ब्लोग्गरों को उनकी अच्छी पोस्ट पर उनके मन के विपरीत राय मिली जो शायद उनको मंजूर नहीं फिर क्या था खून खोल उठा.इसके बाद मुंबई टाइगर पर किसी ने गैर सामाजिक टिप्पडी की जो महावीर जी को भी बिलकुल पसंद नहीं आई,अगर उस जगह मैं होता तो शायद मुझे भी अच्छा नहीं लगता! मैंने कई ब्लॉगों को बहुत अच्छी तरह परखा है इस लिए इस आधार पर मैं यह कह सकता हूँ की यह कोई समस्या वाली बात नहीं है जितना की हम सोच रहे है...एक उदाहरण''हिन्दुस्तान का दर्द'' के सी बॉक्स में किसी शख्स ने लगातार एक हफ्ते तक गालियाँ लिखी और चेतावनी भी दी की में कितनी बुरी-बुरी बातें करूंगा की तुम सी बॉक्स ही हटा दोगे और मेरे नाम से मेरे ही ब्लॉग के कई सदस्यों को गाली दी,यह सिलसिला यूँ ही चला,और वो महाशय थक गए और उनकी यह नौटंकी ख़त्म हो गयी जानते है मैंने ऐसा क्या किया था,वो गाली लिखते थे और मैं उनकी गलियों के ऊपर से अपनी बातें लिखता था जिसमे मैं अपने ब्लॉग के सदस्यों को प्रोत्साहित करता था! मेरे अच्छे विचारों की लम्बी लाइन उसकी गलियों को दबा देती थी! इसी से मुझे पता चला की किसी और से लम्बी लाइन बनाना है तो उसकी लाइन को मिटाओ मत उससे लम्बी लाइन खींच दो !

आजकल यह गंदे विचारों की क्रांति जो ब्लॉग जगत को गन्दा कर रही है बुरी तो है लेकिन झेलना हमारा फ़र्ज़ है क्योंकि ब्लॉग बनाने का पढने का सबको अधिकार है और अगर किसी को हमारी बात अच्छी नहीं लगी और गाली देता है तो गलती उसमे है,बिलकुल नहीं! हमारी तकनीक और हमारे ज्ञान में हां उसके समझाने का तरीका गलत है!एक अनाम से टिप्पडी आई और आपने उस पर पोस्ट बना दी क्या इस तरह से यह सिलसिला थम जायेगा,नहीं बिलकुल नहीं इससे तो यह और भी तेजी से बढेगा क्योंकि आप उसकी बताओ को नजरंदाज करते ही नहीं है आपको उसकी अर्थहीन बातों में भी रूचि है,यह अनाम टिप्पडीकार के लिए गर्व की बात है और यही चीज़ आगे जाकर आपके लिए घातक है!मेरी बात करूँ तो मुझे तो गलियां देने के लिए एक अलग से ही ब्लॉग तैयार किया गया है,खूब गालियाँ मिलती है पता है क्यों? सच पूछो तो मुझे भी आज तक पता नहीं चल सका। पर ठीक है उसका उतना नाम हुआ है जो जितना........हां सही !!तो आप जैसे बुद्धिजीवों को मुझ जैसे नासमझ का यही सुझाव है की आप लोग इन छोटी सी बातों को इतना बड़ा मत बनाइये क्योंकि हमें इन चीज़ों पर विराम लगाना है,और इसके लिए जरुरत है मौनधारण करने की,यदि टिप्पडी जायदा बुरी है तो उसे मिटा दीजिये पर कभी बढावा मत दीजिये!

ब्लॉग्गिंग एक ऐसी दुनिया है जहा शुरुआत तो बड़े जोश के साथ की जाती है लेकिन अंत हम वैसा नहीं कर पाते जो हमारे लिए लाभप्रद हो,यहाँ सिर्फ बह खड़े रहते है जो अंत तक एक समान मेहनत करते है और अपने विचारों को जिंदा रखते है आप अपने विचारों को जिंदा रखिये,इन बुरे विचारों से इन्हें टूटने मत दीजिये।अंत में
''हम जिस तरह से प्रशंसा को स्वीकार कर जाते है चाहे बह झूठी ही क्या ना हो,तो उसी तरह से सच्ची बुराई हो सहन करने की हिम्मत हममें क्यों नहीं है''........वक़्त मिलें कभी तो सोचना॥

संजय सेन सागर
''हिन्दुस्तान का दर्द''
जय हिन्दुस्तान-जय यंगिस्तान


आगे पढ़ें के आगे यहाँ

Comments

  1. आपके सुझाव ने तबियत खुश करदी. मैं तो उत्सुकतावश इधर आया था. आपका पूरा आलेख अत्यंत सामयिक और सटीक लगा. आ्जकल बाढ आई हुई है इस प्रकार की टिपणियों कि.

    रामराम.

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  2. सुन्दर बात। विपरीत टिप्पणी से ज्यादा हलकान नहीं होना चाहिये।

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  3. टिप्पणियों का प्रभाव अपने ’स्व’ तक महसूस करना ठीक नहीं । सुनुयोजित टिप्पणी के लिये तो उसे नजरअंदाज कर देना ही उचित है । धन्यवाद ।

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  4. जब भी कोई नयी शुरुआत होती है तो ये सब नाटक होता ही है!आपको याद होगा जब मोबाइल नए नए चले थे तो किस तरह दुरूपयोग होता था..!जब काल ट्रेस होने लगी तो ये घटनाएँ भी कम हो गयी...यही सब ब्लॉग जगत में भी होगा...

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  5. आपने बिलकुल ठीक लिखा है संजय ji
    शुभ काम करते रहिये. निश्चय ही आपको शुभ लोगों का सहयोग मिलेगा.
    यह मेरा अनुभव है.

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  6. sahi likha hai ........
    aisi tippniyon se ghabraahat hoti hai ..par jo mature blogger hai unpar koi asar nahi padta ..we in sabke aadi ho chuke hote hai ..
    haan itna awashy hai ki tippniyon me gaali nahi honi chaahiye ..aalochna sahi hai ..gaali galouj nahi ...

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  7. बस एक गहरा और सटीक विसलेसन करना चाहता था
    लगता है सफल रहा !

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  8. ब्लॉग्गिंग करते है,तारीफ पसंद है पर गालियाँ सुनने की हिम्मत नहीं...

    ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя द्वारा हिन्दुस्तान का दर्द - 1 दिन पहले पर पोस्ट किया गया
    क्षमा करे अभी ही मैने आपकी सलाहयुक्त पोस्ट को पढा कारण आपका अपना ब्लोग मुम्बई टाईगर इन्ह दिनो ऐसे ही हालात से गुजर रहा है जैसाकी आपने अपने इस विवेचना मे मेरा व मुम्बई टाईगर का जिक्र किया। सजय जी आप कि सभी सलाहे सिर्फ हमारे जैसे नेक, शरीफ, व्यवहारीक बाते करने वालो के लिऐ है- जिसका आप और हम प्रत्येक क्षण जिते है। आपने या हमने किसी का बुरा नही किया नही अपने विचारो मे बुराई है- अच्छे विचार लिखते है जिसमे लोक कल्याण कि बाते होती है वैसे मे कोई गालियो से अपना स्वागत करे तो उसका स्वागत कैसे किया जाऐ ? टिपणीकार कि स्वतन्त्र्ता का विरोघ नही है विरोध है गोरिल्ला युद्ध का जो बिना नामके अपनी कुण्ठा को परोसते है।हमे बिना लेबल कि दवाई लेनी चाहीऐ ? अगर कोई दुकानदार बिना लेबल कि शिशी थमा दे तो क्या छुप छाप घरके कबाड मे लाकर रख देना चाहिऐ ?

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  9. इसका तोड तो निकालना होगा भाई सजयजी!!

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  10. भाई सजयजी, कल हिन्दी ब्लोग के आशिषजी ने भी मेरे हादसे पर एक पोस्ट छापी थी मैने मेरे कुछ सवाल या जवाब थे उनके साथ बॉटे थे ।
    मेरी उनको कि गई टिपणी के कुछ अश हिन्दुस्थान के दर्द के मेरे दोस्तो के लिऐ है वो भी पढे व अपना मत मेरे और आपके पक्ष मे डाले।
    हमे हर हाल मे कानुनन, टेक्नोलॉजी से या अशिष्टाचार से
    ऐसे बेनामी लफगो को नकेल कसनी ही होगी, सजयजी। शिष्टाचार कि बाते शिष्टाचारीयो के साथ करते ही है हम। चोर लफगो को तो अब कोन शिष्टाचार सिखाऐगा ?
    ............................................
    आशिषजी
    मेरे हीसाब से दो उपाऐ है इसके प्रथम तो -
    (A) नो मोडरेशन, नो पंजीकृत, नो डिलीट, नो नैतिकता, सिद्धा छाप डालो और जनता दरबार मे उस बेनामी कि धजिया उडा दो।
    ....
    (B) दुसरा हमे चोर को प़कड कर उसे दण्डीत करने के लिऐ हमे इस ओर वैज्ञानिक अविष्कार करना चाहीऐ भले समय लगे । विदेशी सॉफ्टवेयर कम्पनियो से मदद ली जानी चाहिऐ। एवम एक अखिल भारतीय हिन्दी ब्लोग जगत मे एक ऐसा सगठन होना चाहीऐ जो सिर्फ ब्लोगरो के हीतो कि रक्षा करे, सही का पक्ष सुने, गलत को दण्डित करे, और नई नई सुरक्षा प्रणालियो को देश मे लाकर हिन्दी ब्लोग को भविष्य मे आने वाले विदेशी खतरो, चोरे से भी बचना पडेगा, अगर हम तैयार है तो मुकाबला कर पाऐगे नही तो एक एक व्यक्ती हारकर ब्लोग कि दुकाने बन्द कर देगा फिर सारथी वाले शास्त्रीजी का २०१० तक वाला सपना सपना ही रह जाऐगा। (end)
    .............................................................................
    सजयजी,
    ऐसी सस्था कि प्रबल आवश्यकता पडेगी और आप देखना सजयजी मेरी बात सही होगी। ऐसे "सगठन" का गठन हो के वो हर ब्लोगर से वार्षिक सदस्यता शुल्क लेकर अपनी कार्य प्रणाली शुरु करनी चाहिऐ। चिठा जगत- ब्लोग वाणी- नारद, सहीत जितने भी ब्लोग प्रचारक है, "सगठन" के न्याय आदेश के अनुरुप से बईमान आई. डी. के तमाम चिठे, ईमेल आडी, पब्लिक प्रोफाईल को बेन्ड कर देना चाहिऐ, जरुरत पडती है तो हमे गुगल का भी सहयोग लेना चाहिऐ, पर यह कार्य अकेला व्यक्ती नही कर सकता सगठन कर सकता है।

    ReplyDelete
  11. बहुत सुणी बात लिखी है सा. आपने लखदाद. सर थारे ब्लॉग माथे म्हारे ब्लॉग रो लिंक लगाओ सा.
    अजय कुमार बैरी
    परलीका (राजस्थान)
    09460102521
    इस पते परक्लिक कर सकते हैं।

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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