Skip to main content

हमें शिकायत करने का हक़ नही है...!!! भाग - २

आप लोगो ने पिछली पोस्ट पढ़ी थी अब मैं आपको शिकायत न करने की कुछ और वजह बताता हूँ.....

रिश्वत देने मे और सिफारिश करने मे हम सबसे आगे होते हैं लेकिन जब अपना काम नही होता है तो कहते हैं की बहुत भर्ष्टाचार बढ़ गया है जिसको देखो रिश्वत मांग रहा है....बच्चे के पैदा होने से पहले उसका लिंग पता करने के लिए रिश्वत कुछ कहो तो कहते हैं की आगे तैयारी करने मे आसानी होती है, उसकी पैदा होने के बाद उसके जन्म प्रमाण - पत्र मे उसकी उम्र बदलवाने के लिए हम रिश्वत देते हैं, जब स्कूल में उसका दाखिला कराना होता है तो किसी अच्छे स्कूल में दाखिला कराने के लिए हम रिश्वत देते हैं चाहे हमारा बच्चा उस स्कूल की पढाई झेलने के लायक हो या नहीं हमें उससे कोई मतलब नहीं हैं, किसी खेल की टीम उसको खिलाने के लिए हम रिश्वत और सिफारिश सब कर लेते हैं, और हमारा बेटा खेल लेता हैं वो भी उस लड़के वो निकाल कर जो हमारे बच्चे से बहुत बेहतर खिलाडी है, चाहे जो करना पड़े खेलेगा हमारा बेटा,

बच्चे ने साल बार पढाई नहीं में अब इम्तिहान में कैसे पास होगा लेकिन कोई बात नहीं तेअचेर को रिश्वत देकर किसी और से पेपर दिलवा देंगे, अगर यह नहीं हुआ तो क्लास में चीटिंग का इन्तेजाम करा देंगे, अगर यह भी नहीं हुआ तो कॉपी में नंबर बडवा देंगे, वर्ना हम कॉपी ही बदलवा देंगे, सब कुछ कर्नेगे लेकिन अपने बच्चे को पास करवा कर छोडेंगे.

बेटा पास हो गया, अब वो बड़ा हो गया है उसको गाडी भी चाहिए लेकिन लाईसेन्स कैसे बनेगा उसकी तो अभी उम्र नहीं हुई है, कोई बात नहीं है हम दलाल से बनवा लेंगे थोड़े पैसे ही तो लगेंगे, गाडी से वो जम कर कानून तोडेगा दो चार लोगो को तोडेगा तो क्या हुआ गलती तो सबसे होती है, हम थानेदार को थोड़े पैसे देकर अपने बेटे को छुड़ा लेंगे क्या हुआ अभी छोटा ही तो है उसकी उम्र ही क्या हैं, नादान है,

अब उसकी नौकरी कैसे लगेगी, पढाई तो उसने की नहीं है लेकिन कोई बात नहीं है हमारे पास पैसा बहुत है, कुछ भी कर कर उसकी नौकरी हम लगवा देंगे, थोड़े पैसे क्लर्क को देंगे, थोडी मिठाई जूनियर मेनेजर को देंगे, थोडी मिठाई और एक नेता का सिफारिश लैटर मेनेजर आगे पढ़े...

Comments

  1. हमें हक नहीं, बहुत ठीक लिखा ।-

    औरों के हक की नहीं हद पार करे कोई,
    बस वहीं तक तो सभी को हक है.

    सिर्फ़ हक की ही न बात करे कोई ,श्याम
    अपने दायित्व निभायें,मिलता तभी तो हक है.

    ReplyDelete
  2. अच्छा लिखा है
    इसी तरह लिखते जाइए

    ReplyDelete

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर