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मिलिए एक ब्लागर राष्ट्रपति से

बालेन्दु दाधीच
भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश और ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के व्यक्तित्व और विचारों में जमीन आसमान का फर्क हो, उनके बीच एक दिलचस्प समानता है और वह यह कि दोनों ही तकनीक के प्रेमी हैं और दुनिया के लोगों तक सीधे अपनी बात पहुंचाने के लिए अपने निजी ब्लॉग का संचालन करते हैं।
बुश तो चूंकि अमेरिका जैसे आधुनिक, तकनीक-समृद्ध और पूंजीवादी राष्ट के प्रमुख हैं इसलिए उनकी ब्लॉगिंग कोई बहुत बड़ी खबर नहीं है। लेकिन महमूद अहमदीनेजाद का ईरान तो सूचनाएं जाहिर करने से ज्यादा उन्हें छिपाकर रखने पर जर देता है। वहां अभिव्यक्ति की आजादी और मीडिया की स्वतंत्रता की तो बात ही छोड़िए, सामान्य नागरिक अधिकार तक सरकारी रहमोकरम पर निर्भर करते हैं। वहां आधुनिकता को 'सांस्कृतिक हमले' और कट्टरपंथ को आदर्श जीवन-मूल्य के रूप में प्रचारित किया जाता है। ऐसे देश के राष्ट्रपति का ब्लॉग जैसे बुनियादी रूप से पारदर्शी, अभिव्यक्तिमूलक और लोकतांत्रिक माध्यम में दिलचस्पी रखना हैरानी की बात है। लेकिन यह सच है। महमूद अहमदीनेजाद आखिरकार एक राजनेता हैं और राजनेता हर उपलब्ध मंच का अपनी जरूरत के अनुसार चतुराई भरा प्रयोग करने में माहिर होते हैं। ब्लॉगिंग ने उन्हें प्रचार का वह आधुनिक जरिया उपलब्ध कराया है जिससे वे दुनिया भर में फैले अपने उन आलचकों को जवाब दे सकते हैं जो अमेरिकी प्रचार से प्रभावित होकर उन्हें एक नकारात्मक राजनैतिक ताकत के रूप में लेते हैं। ईरानी राष्ट्रपति के ब्लॉग पर एक नजर डालने से जाहिर हो जाता है कि इसका उद्देश्य किसी तरह की रचनात्मक संतुष्टि पाना नहीं है। वे अपने ब्लॉग के माध्यम से अपनी कट्टर इस्लामी पहचान को मजबूती और इस्लामी सिद्धांतों के प्रति अपने समर्पण को स्वर देते हैं। इसका इस्तेमाल वे ईरानी जनता के बीच अपनी छवि मजबूत बनाने के लिए ही नहीं कर रहे बल्कि अंतरराष्टीय स्तर पर अमेरिका द्वारा बड़े जतन से बनाई गई अपनी अतिवादी नेता की छवि को ध्वस्त करने का काम भी कर रहे हैं।
ब्लॉग की चार भाषाओं- अरबी, फारसी, अंग्रेजी और फ्रेंच चयन से यह बात साफ हो जाती है कि इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ ईरानी और अरब जनता से संपर्क करना ही नहीं बल्कि विकसित देशों के पाठकों तक पहुंचना भी है। अगस्त 2006 में जुमे के दिन अपना ब्लॉग शुरू करते समय अहमदीनेजाद ने वायदा किया था कि वे हर हफ्ते इसे 15 मिनट का समय देंगे। वे राष्ट्रपति पद की व्यस्तताओं के बीच ऐसा करने में तो नाकाम रहे लेकिन फिर भी गाहे-बगाहे सरकार चलाने के आदर्श इस्लामी तौर-तरीकों, इस्लामी जीवनशैली और अमेरिका के विरोध जैसे अपनी दिलचस्पी के मुद्दों पर उनकी टिप्पणियां दिखाई दे जाती हैं। ताज्जुब की बात है कि एक ब्लॉगर के रूप में अहमदीनेजाद उतने आक्रामक नहीं दिखते जितने कि वे अपने भाषणों में दिखते हैं। शायद वे लिखित शब्दों का महत्व अच्छी तरह समझते हैं। हाल ही में लिखी अपनी एक टिप्पणी में अहमदीनेजाद ने इस्लामी ढंग से सरकार चलाने संबंधी विचार जाहिर किए हैं। वे लिखते हैं कि जनता की मदद करना सरकारी अधिकारियों की ईश्वर-प्रदत्त जिम्मेदारी है। बकौल अहमदीनेजाद, इन अधिकारियों के लिए एक अनाथ की मुस्कान लालची शासकों को खुश करने की तरकीबों से ज्यादा महत्वपूर्ण होनी चाहिए। वे ईरानी जनता को उपलब्ध तथाकथित स्वतंत्रता का भी जयघोष करते हैं और तेहरान के अमीर कबीर विश्वविद्यालय में अपने खिलाफ हुए छात्रों के प्रदर्शन को ईरान में मजूद स्वतंत्रता का प्रमाण करार देते हैं। वे लिखते हैं कि विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों द्वारा एक निर्वाचित राष्ट्रपति को अपमानित करने की इस घटना को देखना बड़ा मजेदार था। हालांकि वे इस बात की उपेक्षा कर जाते हैं कि इस घटना के फौरन बाद को छात्र को जेल में डाल दिया गया था।इराक में मारे गए एक अमेरिकी सैनिक की मां को लिखे पत्र में अहमदीनेजाद कहते हैं कि अमेरिका एक युद्धप्रेमी देश है। वे अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी नीतियों की जमकर आलचना करते हैं लेकिन यह भी कहते हैं कि वे अमेरिकी जनता समेत विश्व भर के लोगों का आदर करते हैं। एक अन्य आलेख में वे अमेरिकी कस्टम अधिकारियों द्वारा कुछ देशों के लोगों की उंगलियों के निशान लिए जाने की निंदा करते हुए कहते हैं कि इससे ईरानी लोगों के मन में अमेरिका के प्रति नफरत पैदा हुई है। लेकिन एक लोकतांत्रिक और खुले माध्यम का इस्तेमाल करने के अपने खतरे और चुनतियां भी हैं जिनका सामना महमूद अहमदीनेजाद को भी करना पड़ रहा है। और वह है ब्लॉगों के पाठकों की तरफ से की जाने वाली टिप्पणियां। राष्ट्रपति के ब्लॉग पर जहां अरबी और फारसी भाषा में आने वाली ज्यादातर पाठकीय टिप्पणियां प्रशंसात्मक हैं वहीं अंग्रेजी और फ्रेंच टिप्पणियों में उनकी खूब लानत-मलामत की गई है। किसी ने उन्हें 'दुष्ट'राजनेता करार दिया है तो किसी ने उन्हें विश्व शांति के प्रति खतरे के रूप में देखा है। एक अमेरिकी पाठक ने लिखा है कि स्वतंत्रता और सहिष्णुता आज एक अनिवार्यता है लेकिन यह देखकर बहुत निराशा होती है कि आपका देश बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और अल्पसंख्यकों के दमन में लगा है। बहरहाल, यह भी कम महत्वपूर्ण नहीं है कि इन टिप्पणियों को ब्लॉग पर रहने दिया गया है। शायद यह उनके स्वभाव में आ रही किसी किस्म की नरमी या सहिष्णुता का प्रतीक हो।अहमदीनेजाद का ईरान जब-तब ब्लॉगरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करता रहता है। वहां जबरदस्त सेंसरशिप है और पिछले चुनावों के बाद ईरान में हजारों सरकार विरोधी वेबसाइटों और ब्लॉगों को बंद कर दिया गया था। अरास सिगारची और मुज्तबा समीनेजाद जैसे ब्लॉगरों को एक महीने तक जेल में रखा गया। कई ब्लॉगरों को नजरबंद रखा गया और यातनाएं दी गईं। खैर, ईरान में ब्लॉगरों की जिंदगी भले कितनी मुहाल हो, लेकिन यह बात यकीन के साथ कही जा सकती है कि वहां का कम से कम एक ब्लॉगर इस तरह के सरकारी दमन से पूरी तरह मुक्त है।
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Comments

  1. Greatings from Belgium

    My blog:


    http://blog.seniorennet.be/remi_fietsreizen

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--- संजय सेन सागर

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