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इतने लोग और लाचारी का रोना ..........

संजय जी के पोस्ट और तमाम प्रतिक्रियाओं को पढने के बाद प्रतिक्रिया देनी चाही पर वहां पेस्ट नही हो पाया । अतः यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ । यह मेरी टिप्पणी है उन प्रतिक्रियाओं के ऊपर ................

वाह भाई वाह ! .......... इतने लोग और लाचारी का रोना !.................. संजय जिन बाप और माँओं की बात कर रहे हैं वो कौन हैं? क्या वो हमारे समाज से अलग किसी दुसरे ग्रह से आए हैं ? कहीं न कही हम सब के मन में ऐसा एक शैतान किसी अंधेरे कोने में छुपा होता है । जिसने उन कुछ लोगों पर काबू पाकर ये कुकर्म करवाया ........................कबीर ने कहा था "बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिल्या कोई , जो दिल ढूंडा आपना मुझसे बुरा न कोई "..................................तो मित्रो लाचारी को गोली मारो, ख़ुद को और अपने आस -पड़ोस , सगे-सम्बन्धी , दोस्त आदि को इस शैतान से बचने के लिए तैयार करो। दिक्कत तो आएगी ...... कुछ पाश्चात्य प्रेमी आपको संस्कृति के ठेकेदार और भारतीय तालिबान भी कह सकते हैं तो कोई कट्टरपंथी होने का आरोप लगा सकते हैं । अब आप ही सोचो . या तो आरोप सह कर भी इस पतन को रोकिये या फ़िर इसी तरह लाचारी का रोना रोते रहिये ..............

Comments

  1. आप जो कह रहे है क्या सचमुच बह इतना आसान है हमने कहा और हो गया?
    नहीं इतना आसान नहीं है!
    और ऐसा भी नहीं है हम कोशिश नहीं करते पर बाहरी कोशिशों से कुछ नहीं होगा जब तक की मन साफ़ और स्थिर ना हो जाये !
    लेकिन अगर ऐसा होना संभव हो गया,तो हिन्दुस्तान का दर्द ही ख़त्म हो जायेगा !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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