Skip to main content

मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं !??

पाकिस्तान में कल श्रीलंकाई खिलाडियों पर कुछ दहशतगर्दों ने जो हमला किया उससे ये साफ़ हो गया कि पाकिस्तान में किस तरह से आतंकियों ने अपनी पैठ बना ली है| उनके वहां के स्थानीय नागरिकों और कुछ राजनितिक पार्टयों से शह भी मिली हो सकती है, से इंकार नहीं किया जा सकता | जिस तरह से अपने भारत में भी कुछ संस्थाए प्रत्यक्ष रूप से आतंक का पर्याय बन कर कभी गुजरात तो कभी कर्णाटक में अपनी दहशत फैलाती रहती है| (पढ़े मेरा लेख यहाँ चटका लगाकर) कुल मिला कर यह बहुत ही कायराना पूर्ण हरक़त थी और अल्लाह का लाख लाख शुक्र था कि क्रिकेट के खिलाडियों में से कोई हताहत नहीं हुआ| इससे एक बहुत बड़ा फर्क यह हो सकता है कि पाकिस्तान में घटी यह आतंकी घटना से सीधे रूप से खेल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और मुझे नहीं लगता कि भविष्य में कोई भी वहां खेलने जायेगा लेकिन यह दुर्भग्य भी हो सकता है कि क्रिकेट विश्व-कप की मेजबानी जो एशिया (भारतीय उपमहाद्वीप) के देश करने जा रहे हैं वो ना छीन जाये |

मैंने अभी यहाँ हिंदुस्तान के दर्द पर देखा एक जनाब अपने दर्द का इज़हार कर रहे थे, एक नहीं दो नहीं अनेक पोस्ट एक साथ करके यानि जैसे जैसे दर्द उठा उन्होंने बयां कर दिया, दर्द होना भी चाहिए लेकिन उनका एक दर्द बड़ा ही ख़तरनाक उठा जिस पर मुझे यहाँ अपनी बात रखने पर मजबूर कर दिया | बात उन महाशय की नहीं है, मेरे से इससे पहले कई लोगों ने यही सवाल पूछा था | सबसे पहले तो मैं एक बात कहना चाहूँगा कि आतंकियों का कोई धर्म या मज़हब नहीं होता, चाहे वो प्रज्ञा हो, कर्नल हो, अफज़ल या मसूद (अ)ज़हर, सईद आदि| वो सब के सब किसी न किसी राजनैतिक पार्टियों के लिए काम करते हैं| जैसे भारत में भी है और पकिस्तान में भी है| ये सब जानते हैं|

तो मैं बात कर कर रहा था उन महाशय की एक टिपण्णी की जिसमे उन्होंने लिखा कि मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं | गलती उनकी नहीं है दर असल उन्होंने भी चन्द लोगों की तरह गलती कर बैठी ठीक उसी तरह जैसे एक नयी नवेली ब्रांड न्यू कार को एक अनाडी ड्राईवर चलाये और एक्सीडेंट कर बैठे और लोग दोष दे कार को, ड्राईवर की करतूत पर| अरे! कार को ड्राईवर से मत तौलिये |

इन्ही महाशय की तरह मुझसे एक जनाब ने मुझसे पूछा कि सलीम एक बात बताओ "अगर इसलाम दुनिया का सबसे अच्छा धर्म है तो आखिर बहुत से मुसलमान बेईमान, बेभरोसा क्यूँ हैं और अधिकतर मुसलमान रुढिवादी और आतंकवादी क्यूँ होते है? क्यूँ वो धोखेबाज़ और रिश्वतखोरी और घूसखोरी में लिप्त हैं?

मैं उन सबका जवाब देता हूँ बिन्दुवार- (कि मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं!?)

(1) मिडिया इसलाम की ग़लत तस्वीर पेश करता है-
(क) इसलाम बेशक सबसे अच्छा धर्म है लेकिन असल बात यह है कि आज मिडिया की नकेल पश्चिम वालों के हाथों में है, जो इसलाम से भयभीत है| मिडिया बराबर इसलाम के विरुद्ध बातें प्रकाशित और प्रचारित करता है| वह या तो इसलाम के विरुद्ध ग़लत सूचनाएं उपलब्ध करता/कराता है और इसलाम से सम्बंधित ग़लत सलत उद्वरण देता है या फिर किसी बात को जो मौजूद हो ग़लत दिशा देता है या उछलता है|
(ख) अगर कहीं बम फटने की कोई घटना होती है तो बगैर किसी बगैर किसी प्रमाण के मसलमान को दोषी मान लिया जाता है और उसे इसलाम से जोड़ दिया जाता है | मेरा मानना यह है, जैसा मैं पहले कह चूका हूँ कि आतंकियों का कोई धर्म या मज़हब नहीं होता, चाहे वो प्रज्ञा हो, कर्नल हो, अफज़ल या मसूद (अ)ज़हर, सईद| समाचार पत्रों में बड़ी बड़ी सुर्खियों में उसे प्रकाशित किया जाता है | फिर आगे चल कर पता चलता है कि इस घटना के पीछे किसी मुसलमान के बजाये किसी गैर मुस्लिम का हाथ था तो इस खबर को पहले वाला महत्व नहीं दिया जाता और छोटी सी खबर दे दी जाती है |

(ग) अगर कोई 50 साल का मुसलमान व्यक्ति 15 साल की मुसलमान लड़की से उसकी इजाज़त और मर्ज़ी से शादी करता है तो यह खबर अख़बार के पहले पन्ने पर प्रमुखता से प्रकाशित की जाती है लेकिन अगर को 50 साल का गैर-मुस्लिम व्यक्ति 6 साल की लड़की के साथ बलात्कार करता है तो इसकी खबर को अखबार के अन्दर के पन्ने में संछिप्त कालम में जगह मिलती है | प्रतिदिन अमेरिका में 2713 बलात्कार की घटनाये होती हैं और अपने भारत में हर आधे घंटे में एक औरत बलात्कार का शिकार होती है लेकिन वे खबरों में नहीं आती है या कम प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं| अमेरिका में ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि यह चीज़ें उनकी जीवनचर्या में शामिल हो गयी है | 

(2) काली भेंडें (ग़लत लोग) हर समुदाय में मौजूद हैं

मैं जानता हूँ कि कुछ मुसलमान बेईमान हैं और भरोसे लायक नहीं है | वे धोखाधडी आदि कर लेते हैं| लेकिन असल बात यह है कि मिडिया इस बात को इस तरह पेश करता है कि सिर्फ मुसलमान ही हैं जो इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हैं | हर समुदाय के अन्दर कुछ बुरे लोग होते है और हो सकते है| इन कुछ लोगों की वजह से उस धर्म को या उस पूरी कौम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है जिसके वह अनुनायी है या जिससे वह सम्बद्ध हैं|

(3) कुल मिलाकर मुसलमान सबसे अच्छे हैं

मुसलमानों में बुरे लोगों की मौजूदगी होने के बावजूद मुसलमान सबसे कुल मिलाकर सबसे अच्छे लोग हैं | मुसलमान ही वह समुदाय है जिसमें शराब पीने वालों की संख्या सबसे कम है और शराब ना पीने वालों की संख्या सबसे ज्यादा | मुसलमान कुल मिला कर दुनिया में सबसे ज्यादा धन-दौलत गरीबों और भलाई के कामों में खर्च करते हैं | सुशीलता, शर्म व हया, सादगी और शिष्टाचार, मानवीय मूल्यों और और नैतिकता के मामले में मुसलमान दूसरो के मुक़ाबले में बहुत बढ़ कर हैं|

(4) कार को ड्राईवर से मत तौलिये
अगर आपको किसी नवीनतम मॉडल की कार के बारे में यह अंदाजा लगाना हो कि वह कितनी अच्छी है और फिर एक ऐसा शख्स जो कार चलने की विधि से परिचित ना हो लेकिन वह कार चलाना चाहे तो आप किसको दोष देंगे कार को या ड्राईवर को | स्पष्ट है इसके लिए ड्राईवर को ही दोषी ठहराया जायेगा | इस बात का पता लगाने के लिए कि कार कितनी अच्छी है, कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति उस के ड्राईवर को नहीं देखता है बल्कि उस कार की खूबियों को देखता है| उसकी रफ्तार क्या है? ईंधन की खपत कैसी है? सुरक्षात्मक उपायों से सम्बंधित क्या कुछ मौजूद है? वगैरह| अगर हम इस बात को स्वीकार भी कर लें कि मुस्लमान बुरे होते हैं, तब भी हमें इस्लाम को उसके मानने वालों के आधार पर नहीं तुलना चाहिए या परखना चाहिए | अगर आप सहीं मायनों में इस्लाम की क्षमता को जानने और परखने की ख़ूबी रखते हैं तो आप उसके उचित और प्रामादिक स्रोतों (कुरान और हदीसों) को सामने रखना होगा |

(5) इस्लाम को उसके सही अनुनायी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) के द्वारा जाँचिये और परखिये
अगर आप व्यावहारिक रूप से जानना चाहते है कि कार कितनी अच्छी है तो उसको चलने पर एक माहिर ड्राईवर को नियुक्त कीजिये| इसी तरह सबसे बेहतर और इस्लाम पर अमल करने के लिहाज़ से सबसे अच्छा नमूना जिसके द्वारा आप इस्लाम की असल ख़ूबी को महसूस कर सकते हैं-- पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) हैं |

बहुत से ईमानदार और निष्पक्ष गैर मुस्लिम इतिहासकारों ने भी इस बात का साफ़ साफ़ उल्लेख किया है पैगम्बर सल्ल० सबसे अच्छे इन्सान थे| माइकल एच हार्ट जिसने 'इतिहास के सौ महत्वपूर्ण प्रभावशाली लोग' पुस्तक लिखी है, उसने इन महँ व्यक्तियों में सबसे पहला स्थान पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) को दिया है| गैर-मुस्लिमों द्वारा पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) को श्रद्धांजलि प्रस्तुत करने के इस प्रकार के अनेक नमूने है - जैसे थॉमस कार्लाईल, ला मार्टिन आदि|

"मेरा मानना है कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता चाहे वो प्रज्ञा हो, कर्नल हो, अफज़ल या मसूद (अ)ज़हर, सईद आदि|" -
सलीम खान स्वच्छ सन्देश, लखनऊ, उत्तर प्रदेश


सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

Comments

  1. सलीम जी प्रशांत जी से मैंने अभी कहा था की हर मुस्लिम आतंकवादी नहीं होता,
    आपने बेहतरीन लिखा है
    अच्छा लगा,पढ़कर !
    जय हिन्दुस्तान-जय यंगिस्तान

    ReplyDelete
  2. गलत और बुरे इन्सान हर धर्म या मजहब में है.आपने अच्छा लिखा है

    ReplyDelete
  3. दोस्त तुम जो कह रहे हो काफी हद तक वो सही है... पर एक बात भी गोर करने लायेक है कि जो गलत काम मुस्लिम जाती के नाम पर होता है.. मुस्लिस उसका विरोध पुरजोर तरीके से क्यों नहीं करते. चलो मेरे पास तो कई अनुभव है जो आपकी कई बातों को गलत सिध्य कर देंगे.. आप चाहे तो में उन लोगो से मिलवा भी सकता हूँ जिनसे मेरे अनुभवों में बढोतरी हुई है... हाल ही कि घटना बताता हु..
    दतिया में एक पंडित का लड़का मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था उसने उस लड़की से भाग कर शादी कर ली... लड़की के घर वालों ने उत्पात मचाया, विरोध किया, लड़के के घरवालों को तंग किया, इसमें कोई नयी बात नहीं, यह होना भी चाहिए था... लेकिन सिर्फ उस मुस्लिम परिवार के द्वारा, जिसकी लड़की ने उस लड़के से प्रेम विवाह किया... पर नहीं. दतिया के पूरे मुसलमान एक होकर उस लड़के के परिवार तो प्रताडित कर रहे थे.. क्यों???? इसका जवाब कोई नहीं दे सकता.. जबकि उसी मुस्लिम घर में उनका लड़का पंडित कि लड़की से शादी करके बैठा था. आप ये तो नहीं सोच रहे कि इस बात का इस लेख से क्या लेना देना है...
    वही लेना देना है.. जिस प्रकार गाडी और ड्राईवर का....
    मैं भी सोचता हूँ कि मुसलमान अच्छे लेकिन समय पर उनकी अच्छाई दिखती नही... दिखनी चाहिए... मेरे ग्वालियर में एक नहीं ३-४ कालोनी ऐसी है. जहाँ आज भी पाकिस्तान जिन्दावाद के नारे लगाये जाते है... वो मुस्लिम ही लगते है..
    मुझे मुस्लिम विरोधी मत समझना... पर मैं उनकी सोच का विरोधी हूँ...
    सलीम भाई तुम्हारा दोस्त लोकेन्द्र सिंह

    ReplyDelete
  4. लोकेन्द्र भाई !

    ठीक कहा आपने | हम हिन्दोस्तान में रहते हैं, हम हिन्दोस्तानियों को केवल हिंदुस्तान के ही बारे में वफादारी दिखानी चाहिए और अगर कोई मुल्क़ चाहे वो पाकिस्तान हो या बांग्लादेश या कोई और हमारे देश को नुकसान पहुंचा रहें हो तो हमें एकजुट रहना चाहिए और उनका विरोध करना चाहिए और दंड भी देना चाहिए|
    पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे के बारे में उनका कहना ठीक नहीं तब जबकि हमारे उनके सम्बन्ध ख़राब चल रहे हों लेकिन अगर अच्छे चल रहें हो तो आप पाकिस्तान जिंदाबाद कहें या न कहें आपको हर वक़्त दिल से और दिमाग से भी, समर्पण की भावना के साथ हिंदुस्तान जिंदाबाद कहना चाहिए और कहना पड़ेगा क्यूंकि हम सब हिन्दुस्तानी है और हिन्दू (पढ़े मेरा लेख- हाँ मैं हिन्दू हूँ!)|

    तो कहिये हिन्दोस्तान जिंदाबाद !!!

    सलीम खान
    स्वच्छ सन्देश
    लखनऊ, उत्तर प्रदेश

    ReplyDelete

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

Popular posts from this blog

Warts, Moles and Skin Tags - Can They Develop Into Cancer?

Skin tags pose no real danger. They will not develop into a cancerous growth. However sometimes they may be irritating especially if they are found around the collar. You may even decide to remove a skin tag for cosmetic reasons. When one considers warts, particular attention needs to be taken in the case of genital warts, since these may be transmitted to others. Moreover sometimes genital warts may develop into a cancerous growth. Therefore if you have genital warts you should consult your physician right away. Moles may develop into a cancerous growth. It is therefore important to take appropriate care of any changes that can occur to any mole. If you have many moles on you body it is not a bad idea to have regular checks. Take particular attention after summer because the sun rays may make a mole develop into melanoma or cancer of the skin. Consider any changes that you notice to any of your moles. Specifically you must consult your physician if a mole changes it'...

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

जूजू के पीछे के रियल चेहरे

हिन्दुस्तान का दर्द आज आपको बताने जा रहा है उन कलाकारों के बारे में जिनके काम की बदोलत ''जूजू'' ने सभी के दिलों मे जगह बना ली है..तो जानिए इन कलाकारों के बारे में और आपको यह जानकारी कैसी लगी अपनी राय से अबगत जरुर कराएँ बहुत ही क्यूट, अलग, और मज़ेदार से दिखने वाले जूजू असल में इंसान ही हैं, बस उनको जूजू के कॉस्टयूम पहना दिए गए है। पर ये करना इतना आसान नहीं था, जिस तरह का कॉस्टयूम और एक्ट शूट किए जाने थे उनमे हर मुमकिन कला और रचनात्मकता का प्रयोग किया जाना था। जूजू के पीछे के असल कलाकार कौन है आइये जानते हैं - प्रार्थना सुनिए विज्ञापन- इस विज्ञापन दो जूजू एक पेड़ से लटके दिखाए गए हैं और नीचे एक खाई है। उनमे से एक गिर जाता है और दूसरा अपना फोन निकलकर एक प्रार्थना सुनाता है जिस से की उस के दोस्त की आत्मा को शांति मिल सके। इस विज्ञापन में हैं ये दो कलाकार- रोमिंग विज्ञापन- इस में एक जूजू अपनी गर्लफ्रेंड को खुश करने के लिए फ़ोन पर उससे बातें करता रहता है चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो। इस विज्ञापन में सबसे बड़ी चुनौती थी एफ्फिल टावर और पिरा...