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रतन टाटा का जनता को ''धोखा''

संजय सेन सागर
मध्यम वर्ग परिवार और स्वयं के सपने को साकार करने के लिए रतन टाटा ने ड्रीम प्रोजेक्ट नैनो कार का निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया है। और रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट अब रियल प्रोजेक्ट के रूप में हमारे सामने है।
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिये रतन को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जब उन्होने नैनो प्रोजेक्ट को प्रारंभ किया तो उन्हे ‘‘सिंगुर’’ से धोखा मिला लेकिन भले मानुष नरेन्द्र मोदी जी की मदद से आज नैनो तैयार है।

नैनो के सफल निर्माण से रतन टाटा का सपना तो पूरा हो गया लेकिन मध्यम वर्ग परिवार का सपना अब भी खटाई में है।
टाटा कंपनी ने अपनी पहली खेप में एक लाख नैनो कार का निर्माण किया है जबकि नैनो के लिए 12 करोड़ परिवार खरीदना चाहते है जिनका यह सपना पूरा होना संभव नजर नही आ रहा है।
नैनो को लेकर इन परिवारो का सपना इतना बड़ा हो चुका है कि अब बस यह हकीकत में तब्दील होना चाहता है, लेकिन रतन टाटा जानते है कि इनका सपना पूरा ना होना ही रतन टाटा को फायदा पहुँचा सकता है।


रतन टाटा चाहते तो आराम से 50 लाख - एक करोड़ नैनो का निर्माण कर सकते थे लेकिन इसके बाद नैनो की वो असाधारणतः समाप्त हो जाती और रतन टाटा को अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने की उतनी प्रसंशा या प्रसिद्धि नही मिल पाती जितना की वह चाहते है, रतन टाटा का इस तरह से कम कारो का निर्माण करने की प्रमुख वजह है कि वह चाहते है कि नैनो को लेकर मारामारी हो कुल मिलाकर वह एक अनार सौ बीमार वाली स्तिथि को पैदा करना चाहते है। जिससे की उनका यह ड्रीम प्रोजेक्ट ‘‘वर्ल्ड फेमस ड्रीम प्रोजेक्ट’’ बन सके।
रतन टाटा बुद्धिजीवी व्यक्ति है और वे जानते है कि हर चीज की एक कीमत होती है, बगैर इस कीमत के उस चीज का दीदार कराना भी उस चीज के साथ धोखा है और खुद के हुनर के साथ खिलवाड़ । इसी तर्ज पर रतन टाटा ने एक और पांसा फेका जिसमें आपका और हमारा फसना लगभग सत् प्रतिशत तय है।

टाटा कंपनी ने एक लाख नैनो कार का निर्माण किया है यह जानते हुए कि इसको खरीदने वालो की संख्या 12 करोड़ है और अब यह 1 लाख नैनो कार ‘‘लाटरी सिस्टम ’’ के आधार पर बेची जानी है जिसके लिए आपको पाँच सौ रुपये का फार्म जमा करना होगा और यदि आपका नंबर आता है तो आपको सत्तर हजार रुपये फिक्स डिपाजिट के रूप में जमा करना होगा तब कही जाकर आपको लखटकिया कार मिल सकती है।
इस लाटरी सिस्टम के अंतर्गत लगभग 12 करोड़ फार्म डाले जाने की संभावना है यानि की 12 करोड़ फार्म से प्राप्त राशि 60 अरब रुपये होगी जो नान रिफंडेबल यानि वापिस नही होगी। तो अब आप समझ गए होगे की आपको नैनो मिले या ना मिले, आपका सपना पूरा हो या ना हो, रतन टाटा को कोई फर्क नही पड़ता उनका सपना तो पूरा हो चुका है।
रतन टाटा जनता से नैनो की मुँह दिखाई की जो राशि वसूलने जा रहे है, वो इतिहास की सबसे बड़ी मुँह दिखाई कही जा सकती है।

रतन टाटा की लखटकिया की मुँह दिखाई ही 60 अरब है तो आगे की स्थिति का हिसाब किताब जरा मुश्किल है।
रतन टाटा दुनिया के नामचीनों में शुमार है रातनीति, व्यापार से लेकर हर क्षेत्र में दखल रखते है, यही वजह है कि उनके मित्रो और चेलो की भी कमी नही है। इस बात का सारे नैनो प्रेमियो को डर होना चाहिए की नैनो से इस हालात से निकलकर उनके पास तक, कैसे पहुँच पायेगी। क्योकि हमेशा आम जनता की गिनती, मुख्यमंत्रियो, मंत्रियो, सांसदो, कलेक्टरों, उद्योगपतियो, पुलिस अफसरो, फिल्मी सितारो, क्रिकेटरो के बाद ही शुरु होती है। और देश के इन रईसो की संख्या ही लाखो में है यानि आम जनता की गिनती लाखो के बाद शुरु होगी, और अभी नैनो तो मात्र 1 लाख है।
अगर ऐसा है तो रतन टाटा आम जनता से पहले इन नामचीनो को संतुष्ट करेगे या फिर एक लाख नैनो का एक बहुत बड़ा भाग गुजरात में ही बाट दिया जाए तो हैरत की बात नही होगी।

फिर लाटरी के नाम पर आमजनता से फार्म डलवाकर उनके साथ इस तरह की धोखाधड़ी क्यो?
रतन टाटा को क्या हक है कि वह अपने सपने के लिए आमजनता के सपने को तोड़ दें?
निश्चित सी बात है कि रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट, जनता को सपना दिखाकर उनका पैसा खुद को आर्थिक मजबूती को मजबूती देने में कर रहे है।
रतन टाटा को यह समझना चाहिए कि स्वयं के सपने को पूरा करने के लिए हमें किसी और के सपनों को नही तोड़ना चाहिए। क्योकि यह वही जनता है जो अपना प्यार और सहयोग देकर हमें शीर्ष तक पहुचाँती है और यदि हम शीर्ष तक पहुँचते है तो हमारा नीचे गिरना भी तय होता है। यदि हम अपनो के प्रति बफादार रहते है तो वही लोग अपने सहयोग से फिर हमें शीर्ष पर पहुँचा देते है और यदि हम उनके साथ वफादार नही थे तो अब आपको फर्श से अर्श तक पहुँचाने वाला कोई भी नही है।



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Comments

  1. भाई आपने सही कहा नैनो को लेकर रतन टाटा ने जो लॉटरी स्कीम निकाली है उससे हो सकता है कि रतन टाटा को सिंगूर में हुए नुकसान की भरपाई हो जाए लेकिन उन लोगों का क्या जो बड़ी बैचेनी से नैनो का इंतज़ार कर रहे थे। ख़ैर बाज़ार और बाज़ारवाले अपना रंग तो दिखाएंगे ही।

    ReplyDelete
  2. संजय जी बड़े दिनों के बाद आपका लेख पड़ा
    इसे पहेले जो देनिक भास्कर में पड़ा था उसको लेकर कुछ सवाल मन में उठ रहे है आप जब फ्री हो अपने इम्तहान से तो बातें तब ही पूछूंगी

    ReplyDelete
  3. sanjay ji bilkul sahi faramaya aapne yeh jitne bhi bade business tycoon time aane par hi colour badalate hai inhe logo ke immotion se khilwar karne me maza aata hai, bahut acha lekh aapne likha hai jiske liye humko aapko appreciate karte hain, thanks

    ReplyDelete

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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