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अफजल गुरू को फासी नहीं देना?
मुसलिम तुष्टीकरण?
मुम्बई में बिहारियों पर हमला?
अंतुले प्रकरण?
भारतीय गरीबों की नुमाईस(राहुल गाँधी द्वारा)?
अमरनाथ भूमि प्रकरण?
नवीन चावला के मदद से?
इन सब के बाद भी सायद काग्रेंस फिर सत्ता में आ जाये इससे शर्म की बात और क्या हो सकती है कि आज भारतीय राजनीति विकल्प विहीन हो गई है?
एक तरफ चोर हैं तो एक तरफ डाकू?
अब अकेला मै क्या कर सकता हूँ।
कुछ लोग मुझमें कुछ ज्यादा ही इन्टरेस्ट ले रहे है,मेरा पता जनना चाहते हैं,मैने देश के लिये क्या किया जानना चाहते हैं।मै किस जाति का हूँ जानना चाहते हैं तो उनको मै बताना चाहता हूँ मै केन्द्रीय मन्त्री महावीर प्रसाद के लोक्सभा क्षेत्र बाँसगाँव का रहने वाला हूँ,मैने उनको सिर्फ पोस्टरों मे देखा है इस समय जो कत्ल के जुर्म में न्यायालय द्वारा दंडित हैं फिर भी मंत्री बने हुये हैं?
झारखंड मुक्ति मोर्चा के सिबू सोरेन को इन्होंन्ने (कांग्रेस) ने इस्तिफा देने पर मजबूर कर दिया काग्रेस वाले होते ही हैं मक्कार?मीडिया भी सिर्फ भाजपा वालों को कोसता है।क्यों उनको मुसलिम व ईशाई मशिनरियों द्वारा फंड जो मिलता है?

Comments

  1. success mantra ji aapka naam to nahi pata,lekin bahut khoob likha hai !!

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  2. This comment has been removed by the author.

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  3. सक्सेज़ मंत्रा जी,

    आपने जो कुछ लिखा वो वाकई कांग्रेस के लिए यक्ष प्रश्न है | कम-अज़-कम मैं आपकी तरह इस बात का पूरी तरह से समर्थन करता हूँ की कांग्रेस को अब सत्ता में आने का कोई हक नहीं | भाई ! जनता को आखिर कब तक आप बेवकूफ बना सकते हैं, एक साल, दो साल, तीन साल या पचास साल....हाँ, हाँ आप उसे सदियों तक बेवकूफ बना सकते हैं. क्यूँ? क्यूंकि जनता ख़ुद चाहती है बेवकूफ बनना. उसकी आँखे नहीं खुलती| आप सदियों तक इस देश पर राज भी कर सकते हैं, बताने की ज़रूरत नहीं है... मोती, जवाहर से राहुल 'लाल' तक और आगे भी... बनते रहिये बेवकूफ!

    रही विकल्प की बात तो जनता ने कई विकल्प देखे, आपने, हमने और सबने लेकिन वही ढाक के तीन पात, सब ..... (टूं की आवाज़) एक ही मिट्टी के बने हैं. कुछ ने किसी की आस्था पे चोट करके अपने लोगों की आस्था को क्षणिक खुशी देकर उनकी ही आस्था को कैश करते रहे. और कहते रहे की बहुमत से आयेंगे तब देखियेगा| यानि अभी और बेवकूफ बनिए बहुमत तक |

    तो जनाब, ये हों या वो हों सभी किसी न किसी तुष्टिकरण की बात करते रहते हैं......... अगर आप इधर जाते हैं तो भी या उधर जाते हैं तो भी| लगेगा कि सही है मगर जनाब देश और हमारी संस्कृति के जो टुकड़े होते जा रहे है उसका क्या होगा | उसके बारे में हमें और आपको सबको एक बात का सिर से सिर जोड़ कर मंथन करना होगा क्या सही है, क्या सही होगा जो सबके लिए समान हो, सबके लिए अच्छा विकल्प हो |


    अगर कुछ ग़लत कहा हो तो मुआफ करियेगा !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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