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मनोज द्विवेदी जी का लेख

हिन्दुस्तानी की आवाज़ प्रतियोगिता के तहत हम आज मनोज द्विवेदी जी का लेख प्रकाशित करने जा रहे है,मनोज जी के लेख ने शीर्ष पांच मे प्रथम स्थान बनाया है !






मनोज द्विवेदी,दिल्ली
हमने आपसे पूछा-
''हिन्दुस्तान को अमेरिका के तलवे चाटने की क्या जरूरत है क्या इससे पाकिस्तान पर कोई फर्क पड़ेगा।''
मनोज जी ने कहा-
वर्तमान में भारत-पाकिस्तान के बीच जिस तरह गर्मागर्म बहस छिड़ी है। इसका विषय अमेरिका आयातित है, आपको यह जानकर अफसोस होगा कि जिस आतंक को खत्म करने की मुहिम अमेरिका ने शुरू की है, उसे पैदा करने वाला भी खुद अमेरिका ही है । इसी उद्देश्य पूर्ति के लिये पाकिस्तान की धरती पर भारी संख्या में अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। जिसकी वजह से ही भारत कोई भी कार्यवाही करने से पहले अमेरिका की तरफ देख रहा या यूं कहिये की अमेरिका के तलवे चाटना पड़ रहा है, क्योंकि पाकिस्तान पर हमला परोक्ष रूप से अमेरिका पर हमला होगा। दूसरी बात इस पूरे प्रकरण में चीन की चुप्पी यानि मौनम् सम्मति लक्षणम्। चीन की तरफ से भारत को मौन स्वीकृति है, क्योंकि उसे पता है कि भारत का कोई भी कठोर कदम अमेरिकी हितों को भी रौंद डालेगा। पाकिस्तान की सहायता चीन की नीति हो सकती है लेकिन अमेरिका की मुखालफत चीन का एजेंडा है। जहां तक बात पाकिस्तान की है आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पाकिस्तान में पैरलर गर्वमेंट चलती है। टीवी पर बयान देने वाले नेता तो कठपुतली मात्र हैं, सरकार की असली डोर तो पाकिस्तान की सेना व आतंक समर्थित आईएसआई के हाथ में है। सच्चाई यही है कि पाकिस्तान में तीन सेनायें लामबंद हैं, पहली पाकिस्तान की अपनी सेना, दूसरी आतंकियों की तालिबान सेना और तीसरी आतंक विरोधी वार में हिस्सा ले रही अमेरिकी सेना। ऐसी स्थिति में किस पाकिस्तान पर हमला किया जा सकता है, आतंकियों वाले पाकिस्तान पर या अमेरिकी सेना की निगरानी वाले पाकिस्तान पर या शरीफ नेताओं वाले पाकिस्तान पर। ऐसा भी हो सकता है कि मानव विनाशक न्यूक्लियर बम आतंकियों की निगरानी में हो। इसी वजह से भारत काफी सोच-समझकर अपनी बात रख रहा है। जहां तक पाकिस्तान पर फर्क पडऩे की बात है तो इतना तो स्पष्टï हो ही जाना चाहिये कि आतंकियों की नकेल कसने का माद्दा यहां की सरकार में है ही नहीं फिर फ र्क पडऩे की कोई वजह नजर नहीं आती। पाकिस्तान पर इसका कोई फर्क नहीं पडऩे वाला है, तब तक कि जब तक वहां अमेरिकी सेनायें मौजूद हैं। तालिबानी काबायलियों ने अमेरीकी सेना के ऑपरेशन को जोरदार टक्कर दी है। अमेरिका अपने मिशन की सफलता के लिये ही भारत को संयम बरतने की सलाह दे रहा है और पाकिस्तान की सरकार इस बात को अच्छी तरह भुनाना जानती है।
मनोज जी शीर्ष पांच मे आने के लिए ''हिन्दुस्तान का दर्द''की तरफ से बहुत-बहुत बधाई,आपसे से आग्रह है की प्रतियोगिता कलम का सिपाही के लिए भी सहयोग करें!
सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

Comments

  1. शीर्ष पांच मे प्रथम आने के लिए बहुत बहुत बधाई
    आपने लेख मुझे बहुत पसंद आया,आपसे आगे भी इसी तरह के सहयोग की आशा !!

    ReplyDelete
  2. मनोज जी बहुत-बहुत बधाई
    क्या हुआ अगर मैं शीर्ष पांच में नहीं आ पाया तो,आप तो आ गए !!
    आपका लेख पड़ा बहुत ही बढ़िया लिखा है !

    ReplyDelete
  3. मनोज जी आपको बधाई,अच्छा लगा लेख पढ़कर.

    ReplyDelete
  4. मनोज जी बहुत अच्छा लेख साथ ही साथ आपको बधाई हो शीर्ष प्रथम मे आने की !!

    ReplyDelete

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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