अब वहां चमन नही श्मशान था. By News4Nation December 13, 2008 वो भी था एक आम तूफान की तरह,वो भी तो चमन उजाड़ता चला गया.कुछ अलग था तो बस इतना ही,के इस बार मेरे चमन की बारी थी.भागता रहा मैं बिखरे फुलों के पीछेसमेटता रहा मैं एक एक तिनकाहर कोशिश नाकाम रही क्यूंकि.....अब वहां चमन नही श्मशान था Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Labels ''हिन्दुस्तानी की आवाज़'' हाथ साफ़ करना चाहता हूँ Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments love-is-lifeDecember 13, 2008 at 12:36 PMकाफी सटीकता से सब्दों को पिरोया है ..बहुत खूब वैसे मैं आपकी काफी रचनाये पड़ी है इसे मैं जान चुकी हूँ की यह गुण आपने खूब है !ReplyDeleteRepliesReplysweet girlDecember 13, 2008 at 12:39 PMगजब की रचना ..बहुत अच्छेReplyDeleteRepliesReplyपरमजीत सिहँ बालीDecember 13, 2008 at 12:49 PMबहुत बढिया व सटीक मुक्तक हैं।ReplyDeleteRepliesReplyAdd commentLoad more... Post a Comment आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!! --- संजय सेन सागर
काफी सटीकता से सब्दों को पिरोया है ..बहुत खूब वैसे मैं आपकी काफी रचनाये पड़ी है इसे मैं जान चुकी हूँ की यह गुण आपने खूब है !
ReplyDeleteगजब की रचना ..बहुत अच्छे
ReplyDeleteबहुत बढिया व सटीक मुक्तक हैं।
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