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डॉ.अभिज्ञात Dr.Abhigyat:लॉकर में धान/काव्य-पाठ

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डॉ.अभिज्ञात Dr.Abhigyat: वक़्त पक्की फर्श पर गिरा हुआ शीशा है/काव्य-पाठ

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सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ कुछ दिनों से मुझको भी || यारो कुछ कुछ होने लगा || दिल मेरा भी खोने लगा || अपने दफ्तर की टेबल पर || मै भी अब तो सोने लगा ||  दिल मेरा भी खोने लगा || रात हसीना एक आती है || सपनो में हमें जगाती है || हाथ पकड़ कर मेरा ओ || अपने साथ उड़ाती है || इश्क के चक्कर में पड़ कर मै || प्रेम बीज को बोने लगा || दिल मेरा भी खोने लगा || अभी गाल में पड़े निशान है || उसने हंस के काटा था || मेरी भी चीख निकल गयी थी || कुछ करने के लिए आमादा था || प्रेम बाग़ में दोनों नाचे थे || उसके बिन अब रोने लगा || दिल मेरा भी खोने लगा ||

दोहा सलिला

ओशो चिंतन: घाट भुलाना 4 * शिष्य बने कोई अगर, है उसका अधिकार। गुरु न बनूँ मैं, है मुझे,  केवल यह स्वीकार।। * पंगु करें गुरु; शिष्य का, लेकर खुद पर भार। अपना बोझा कम नहीं, क्यों लूँ और ...

पिता की हत्या और माँ से शादी की, दर्दनाक कहानी जिससे दुनियां दहल उठी.

कहते हैं कि विधि का लेख मिटाए नहीं मिटता। कितनों ने कितनी तरह की कोशीशें की पर हुआ वही जो निर्धारित था। राजा लायस और उसकी पत्नी जोकास्टा। इन्होंने भी प्रारब्ध को चुन्नौती दी थी, जिससे जन्म हुआ संसार की सबसे दर्दनाक कथा का। यूनान में एक राज्य था थीबिज। इसके राजा लायस तथा रानी जोकास्टा के कोई संतान नहीं थी। कफी मिन्नतों और प्रार्थनाओं के बाद उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई थी। पर खुशियां ज्यादा दिन नहीं टिक सकीं। एक भविष्यवक्ता ने भविष्वाणी की कि उनका पुत्र, पित्रहंता होगा और अपनी ही मां से विवाह करेगा। यह जान दोनो आतंकित हो गये और अपने नवजात शिशु के हाथ पैर बंधवा कर उसे सिथेरन पर्वत पर फिंकवा दिया। पर बच्चे की मृत्यु नहीं लिखी हुई थी। जिस आदमी को यह काम सौंपा गया था, वह यह अमानवीय कार्य ना कर सका। उसने पहाड़ पर शिशु को पड़ोसी राज्य, कोरिंथ, के चरवाहे को दे बच्चे की जान बचा दी। उस चरवाहे ने अपने राजा उससे पूछा की पोलिबस की तो कोई संतान नहीं थी , जिसकी कोई संतान नहीं थी, को खुश करने के लिए बच्चे को उसे सौंप दिया। रस्सी से बंधे होने के कारण शिशु के पांव सूज कर कुछ टेढे हो गय...

हास्य व्यंग के इंटरनेशनल शायर हिलाल स्योहारवी

सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ जिनकी आज पंचवीं पुण्य तिथि है हास्य व्यंग के इंटरनेशनल शायर हिलाल स्योहारवी अपनी शायरी से कहकहे लगवाते हुए नेताओं और व्यवस्था पर चोट करने वाले हिलाल स्योहारवी की आज पुण्यतिथि है। उनहोंने हिंदुस्तान ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी शायरी की छाप छोड़ी। न तुम संभले तो फिर नया तूफान आयेगा। मदद को राम आएंगे न फिर रहमान आएगा। जैसे शेर ने माध्यम से समाज को आगाह करने वाले अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर हिलाल स्योहारवी का वास्तविक नाम हबीबुर्रहमान था। शायरी में आने के बाद उन्होंने अपना उपनाम हिलाल जिसका अर्थ होता है चांद रख लिया। १५ नवंबर २०१२ को उनकी मृत्यु हुई थी। अपनी धमाकेदार नज्मों और कतात के लिए लोग उन्हें आज भी उन्हें याद करते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत पर इनके इस कता ने बहुत ख्याति पाई - बजा कहा जो शहीदाने वतन कहा तुझको, ये हैसीयत तुझे दुनिया में नाम करके मिली। अब इससे बढ़के तेरा एहतराम क्या होगा, मिली जो मौत भी तुझको सलाम करके मिली। हिलाल स्योहरवी को गालिब इंस्टीट्यूट नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति डा. शंकरदयाल शर्मा द्वारा उर्दू अद...