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vimarsh: nyaypalika men sendh -sanjiv

विमर्श  : भारतीय न्यायपालिका में राजनीति की सेंध :  स्वतन्त्रता दिवस के हर्षोल्लास में भारत के लोकतंत्र के सर्वाधिक सदृश और विश्वासपात्र स्तंभ न्यायपालिका की नींव में राजनीती की सेंध लगाने की और लोगों का ध्यान नहीं जा पाया।  माननीय न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कॉलेजियन प्रणाली को समाप्त कर नयी प्रणाली को लाने के लिये बिल संसद में बिना विशेष बहस के लगभग सर्व सम्मति से पास कर दिया गया.  भारतीय संसद में सिवाय भाटी और सुविधाएँ बढ़ाने के  दलों और नेताओं में कभी किसी बिंदु पर मतैक्य नहीं होता। न्यायिक सक्रियता के कारण सभी दलों के नेताओं को पिछले दिनों कटघरे में पहुँचाना पड़ा। जनता को हार्दिक प्रसन्नता हुई किन्तु नेताओं के मन में न्यायाधीशों के प्रति कटुता पल गयी. कॉग्रेस कसमसाती रही किन्तु न्यायपालिका को छेड़ने की हिम्मत नहीं कर सकी.  गत आम चुनाव में बी.जे.पी. को मिले जनमत का श्रेय मोदी जी को दिए जाने और मोदी जी की दबंग व्यक्तित्व के कारण विरोधी दल राजनैतिक विरोध के दमन किये जाने को लेकर आशंकित हैं. इस कारण लालू...

प्रायोजित पुस्तक विमोचन और एक शिकायत|

जयप्रकाश चौकसे | खबर है कि दिलीप कुमार और उनकी पत्नी सायरा बानू ने मुंबई के खार पुलिस स्टेशन पर समारा प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की है। दिलीप कुमार द्वारा बताई गई जीवनी को कलमबद्ध किया पत्रकार उदयातारा नायर ने जिनके मार्फत इस कंपनी ने फरवरी में सायरा बानू से कहा कि दिलीप साहब की "सब्सटेन्स एंड शैडो' का विमोचन कार्यक्रम वे संचालित करेंगे और उस कार्यक्रम में पूरा फिल्म उद्योग मौजूद होगा तथा प्रायोजकों से पांच करोड़ की रकम प्राप्त होगी। आजकल इवेन्ट मैनेजमेंट कंपनियां अनेक प्रकार के काम आयोजित करती हैं, यहां तक कि राष्ट्रीय चुनाव भी एक "इवेन्ट' की तरह आयोजित किए जाते हैं और नेता भी "प्रोडक्ट' की तरह प्रस्तुत किए जाते हैं। यह बाजार की टोपी में सुर्खाब के पर की तरह चस्पा हो रहा है। महान कलाकार दिलीप की किताब के विमोचन पर अमिताभ बच्चन और आमिर खान ने अहम भूमिकाएं निबाहीं और सारे प्रमुख सितारे मौजूद थे। दरअसल पूरा फिल्म उद्योग दिलीप साहब का इतना आदर करता है कि महज सूचना पर ही जलसे में शरीक हो जाते। आजकल सितारों की मौजूदगी वाले आयोजन टेल...

लो क सं घ र्ष !: गांधी का कत्ल साम्राज्यवादी ताकतों ने ‘गोडसे’ से करवाया

बाराबंकी। साम्राज्यवादी ताकतों ने अपने नये स्वरूप से न सिर्फ हिन्दुस्तान को वरन एशिया समेत कई अफ्रीकी देशों को अपने शिकंजे में ले लिया है, साम्राज्यवादी ताकतों के असली चेहरे को नजदीक से सबसे पहले महात्मा गांधी ने देखा था और वह उसका शिकार भी हुए थे इसीलिए उनका कत्ल साम्राज्यवादी ताकतों ने ‘गोडसे’ से करवाया था क्योंकि इस बात का खतरा था कि उनके हिन्दुस्तान छोड़ने के बाद 80 साल का बुजुर्ग गांधी कहीं पूंजीवादी राज्य की कब्र हमेशा-हमेशा के लिए खोद न दे और वह यहां के प्राकृतिक खजाने से वंचित न हो जाए। यह विचार व्यक्त करते हुए रामसेवक यादव स्मारक इण्टर कालेज लखपेड़ाबाग में पूर्व नौसेनाध्यक्ष एडमिरल विष्णु भागवत ने लोक संघर्ष पत्रिका द्वारा आयोजित गोष्ठी ‘साम्राज्यवादी ताकतों का आतंक व एशिया’ विषय पर बोलते हुए कहा कि मौजूदा हुकूमत साम्राज्यवादी ताकतों के साये में काम कर रही है। इसीलिए दूसरे मुल्कों से सबक लेते हुए होशियार रहने की जरूरत है। साम्राज्यवादी ताकतों ने यहां के निवासियों के मनो मस्तिष्क के ऊपर ऐसा जादू किया है कि आज उन्हीं की समर्थित सरकार कायम हो गयी है। भारतीय संस...

chhand salila: durmila chhand -sanjiv

ॐ छंद सलिला: दुर्मिला छंद      संजीव * छंद-लक्षण : जाति लाक्षणिक, प्रति चरण मात्रा ३२ मात्रा, यति १०-८-१४, पदांत  गुरु गुरु, चौकल में लघु गुरु लघु (पयोधर या जगण) वर्जित। लक्षण छंद :  दिशा योग विद्या / पर यति हो, पद / आखिर हरदम दो गुरु हों छंद दुर्मिला रच / कवि खुश हो, पर / जगण चौकलों में हों  (संकेत: दिशा = १०, योग = ८, विद्या = १४)   उदाहरण :  १ . बहुत रहे हम, अब / न रहेंगे दू/र मिलाओ हाथ मिलो भी      बगिया में हो धू/ल - शूल कुछ फू/ल सरीखे साथ खिलो भी      कितनी भी आफत / आये पर भू/ल नहीं डट रहो हिलो भी      जिसको जो कहना / है कह ले, मुँह / मत खोलो अधर सिलो भी             २. समय कह रहा है / चेतो अनुशा/सित होकर देश बचाओ               सुविधा-छूट-लूट / का पथ तज कद/म कड़े कुछ आज उठाओ       घपलों-घोटालों / ने किया कबा/ड़ा जन-विश्वास डिगाया ...

sai charcha: sanjiv

साईं, स्वरूपानंद और मैं  संजीव  * स्वामी स्वरूपानंद द्वारा उठायी गयी साईं संबंधी आपत्ति मुझे बिलकुल ठीक प्रतीत होती है। एक सामान्य व्यक्ति के नाते मेरी जानकारी और चिंतन के आधार पर मेरा मत निम्न है: १. सनातन: वह जिसका आदि अंत नहीं है अर्थात जो देश, काल, परिस्थिति का नियंत्रण-मार्गदर्शन करने के साथ-साथ खुद को भी चेतन होने के नाते परिवर्तित करता रहता है, जड़ नहीं होता इसी लोए सनातन धर्म में समय-समय पर देवी-देवता , पूजा-पद्धतियाँ, गुरु, स्वामी ही नहीं दार्शनिक विचार धाराएं और संप्रदाय भी पनपते और मान्य होते रहे हैं ।  २. देवता: वेदों में ३३ प्रकार के देवता (१२ आदित्य, १८ रूद्र, ८ वसु, १ इंद्र, और प्रजापति) ही नहीं श्री देवी, उषा, गायत्री आदि अन्य अनेक और भी वर्णित हैं । आत्मा सो परमात्मा, अयमात्मा ब्रम्ह, कंकर सो शंकर, कंकर-कंकर में शंकर, शिवोहं, अहम ब्रम्हास्मि जैसी उक्तियाँ तो हर कण को ईश्वर कहती हैं ।  आचार्य रजनीश ने खुद को ओशो कहा और आपत्तिकर्ताओं को उत्तर दिया कि तुम भी ओशो हो अंतर यह है की मैं जानता हूँ कि मैं ओशो हूँ, त...

मेरी छठी पुस्तक तीन वर्ष की प्रतीक्षा के बाद

मेरी छठी पुस्तक तीन वर्ष की प्रतीक्षा के बाद  प्रकाशक महोदय ने हिन्दी निबन्ध की पुस्तक  "आधुनिक सन्दर्भ में" २५ जून २०१४ को मुझे  प्राप्त  करा दी.  प्रकाशक महोदय-  अतुल गुप्ता,  जाह्नवी  प्रकाशन,   ए-७१, विवेक विहार, फ़ेस-२,  दिल्ली-  ११००९५   को  बहुत-बहुत धन्यवाद.

chhand salila: kamand chhand -sanjiv

ॐ छंद सलिला:   ​​​ कमंद छंद ​ संजीव * छंद-लक्षण: जाति लाक्षणिक, प्रति चरण मात्रा ३२ मात्रा, यति १५-१७, पदांत गुरु गुरु लक्षण छंद:   रखें यति पंद्रह-सत्रह पर, अमरकण्टकी लहर लहराती    छंद कमंद पदांत गुरु-गुरु, रसगंगा ज्यों फहर फहराती  उदाहरण: १. प्रभु को भजते संत सुजान, भुलाकर अहंकार-मद सारा     जिसने की दीन की सेवा, उसने जन्म का पाप उतारा     संग न गया कभी कहीं कुछ, कुछ संग बोलो किसके आया      किसे सगा कहें हम अपना, किसको बोलो बोलें पराया  २. हम सब भारत माँ के लाल, चरण में सदा समर्पित होंगे     उच्च रखेंगे माँ का भाल, तन-मन के सुमन अर्पित होंगे     गर्व है हमको मैया पर, गर्व हम पर मैया को होगा     सर कटा होंगे शहीद जो, वे ही सुपूजित चर्चित होंगे     ३. विदेशी भाषा में शिक्षा, मिले- उचित है भला यह कैसे?     विरासत की सतत उपेक्षा, करी- शुभ ध्येय भला यह कैसे?     स्वमूल्य का अवमूल्यन कर, परमूल्यों को बे...