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हास्य कुण्डली: साली महिमा संजीव 'सलिल'

हास्य कुण्डली: साली महिमा संजीव 'सलिल' * साली जी गुणवान हैं, जीजा जी हैं फैन.. साली जी रस-खान हैं, जीजा सिर्फ कुनैन.. जीजा सिर्फ कुनैन, फ़िदा हैं जीजी जी पर. सुबह-शाम करते सलाम उनको जी-जी कर.. बीबी जी पायी हैं मधु-रस की प्याली जी. बोनस में स्नेह लुटाती हैं साली जी. * साली की महिमा बड़ी, कभी न भूलें आप. हरि के पहले कीजिये साली जी का जाप.. साली जी का जाप करें उपवासे रहकर. बीबी रहे प्रसन्न, भाव-सलिला में बहकर.. सुने प्रार्थना बीबी, दस दिश हो खुशहाली.. सुने वंदना जिस जीजा से प्रतिदिन साली. * जिसकी साली हो नहीं, उसका चैन हराम. नीरस हो जीवन सकल, बिगड़ें सारे काम.. बिगड़ें सारे काम, रहें गृह लक्ष्मी गुमसुम. बिन संज्ञा के सर्वनाम नाकारा हो तुम. कहे 'सलिल' साली-वंदन से  किस्मत चमकी. उसका गृह हो स्वर्ग, खूब हो साली जिसकी.. *******

विजेता बनने का मौका मत चूकिए

विजेता बनने का मौका मत चूकिए  ब्लॉग पहेली -२ आ चुकी है आपके सामने .विजेता बनने का मौका मत चूकिए  .जल्दी से दीजिये सही जवाब .कहीं कोई और आगे न निकल जाएँ !                    shikha kaushik  http://blogpaheli.blogspot.com                                                      [चित्र फोटो सर्च से साभार ]

कुछ तुम कहो कुछ मैं कहु |: हमें क्यों चाहिए जन लोकपाल?

कुछ तुम कहो कुछ मैं कहु |: हमें क्यों चाहिए जन लोकपाल? : हमें क्यों चाहिए जन लोकपाल? सामान्य सवाल 1. हमें क्यों चाहिए लोकपाल? 2. क्या कहता है जन लोकपाल कानून? 3. लोकपाल और लोकायुक्त का काम ... सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

मेरी कविताओं का संग्रह: कई अरसो तक लड़ते रहे हम

मेरी कविताओं का संग्रह: कई अरसो तक लड़ते रहे हम : कई अरसो तक लड़ते रहे हम आज़ादी को पाने के लिए…; और कई अरसे गुज़र चुके यूंही आज़ादी को पाए हुए…!शहीदों ने तो कर दिया अपना कर्म अंग्रेजों ... सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

कुछ तुम कहो कुछ मैं कहु |: अब जोश जवानी का देखो, कैसी करवट ले डाली है !

कुछ तुम कहो कुछ मैं कहु |: अब जोश जवानी का देखो, कैसी करवट ले डाली है ! : अब जोश जवानी का देखो, कैसी करवट ले डाली है ! दिल में इनके चिंगारी है, वो और भडकने वाली है !! खुद को वह हिंदू न मुस्लिम, सिक्ख ईसाई कहता है...

अपनी हदें पार कर गया है मर्ज़ ..

अपनी हदें पार कर गया है मर्ज़ जब भ्रष्टाचार का ॥ तब हमें किया है गांधीवादी शिष्टाचार समझ लो यह आन्दोलन हमने इसी मर्ज़ की दवा ली है .................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जी हाँ में आज़ाद भारत का नेता हूँ .......

जी हाँ मेरे भारत वासियों में आज़ाद भारत का नेता हूँ । जनता से सिर्फ और सर लेता ही लेता हूँ कभी वोट लेता हूँ ..तो कभी ट्रांसफर कभी कोई काम कराने के पेसे लेता हूँ संसद में में अगर पहुंचूं तो बस सवाल पूंछने के भी रूपये लेता हूँ हां दोस्तों में भारत देश का नेता हूँ में देश को देश की जनता को सिर्फ और सिर्फ भ्रस्टाचार , बेईमानी , अनाचार ही देता हूँ जी हाँ दोस्तों में आज़ाद भारत का नेता हूँ में कहीं भी किसी भी पार्टी में रहूँ सरकार किसी की भी हो बस विपक्ष में रहूँ या सरकार में आपसी सान्थ्गान्थ कर या तो संसद से वाक् आउट करता हूँ या संसद ही नहीं जाता हूँ अगर विश्वास मत के पक्ष में वोट डालना पढ़े तो रिश्वत लेकर संसद में में कोई भी सरकार हो उसे बचाता हूँ भ्रष्टाचार की जहां बात हो वहां खुद को गांधीवादी कहलवाता हूँ संसद हो चाहे हो विधान सभा चाहे हो पंचायत जब भी चुनाव होते हैं करोड़ों रूपये पानी की तरह बहाता हूँ वोट मांगने जाता हूँ तब जनता और वोटर होती है जनार्दन और जब वोट लेकर नेता बन जाता हूँ तो बस जनता अगर मिलने आये तो उसे पहचानने से इनकार क...