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चाहिए निष्ठावान वोटर…[लोकतंत्र-3]

चु नाव की ऋतु में विभिन्न प्रकार के वचन सुनने को मिलते हैं। इन वचनों में याचना, संदेह, आरोप, भय, संताप, प्रायश्चित, प्रतिज्ञा, प्रार्थना आदि कई तरह के भाव होते हैं जिनका लक्ष्य आम आदमी होता है जो लगातार मौन रहता है। वह बोलता नहीं, अपना  मत देता है जिसे वोट कहते हैं।  वोट  ही उसका वचन है, उस वचन के जवाब में, जो उसने नेताओं के मुंह से सुने हैं।  वोट  एक प्रार्थना भी है, जिसे मतपत्र के जरिये वह मतपेटी में काल के हवाले करता है, इस आशा में की उसकी वांछा पूरी होगी। प्र जातंत्र में  वोट  vote का बड़ा महत्व है। कोई भी निर्वाचित सरकार वोट अर्थात मत के जरिये चुनी जाती है। यह शब्द अंग्रेजी का है जो बीते कई दशकों से इतनी बार इस देश की जनता ने सुना है कि अब यह हिन्दी में रच-बस चुका है जिसका मतलब है मतपत्र के जरिये अपनी पसंद या इच्छा जताना। चुनाव के संदर्भ में मत और मतदान शब्दों का प्रयोग सिर्फ संचार माध्यमों में ही पढ़ने-सुनने को मिलता है वर्ना आम बोलचाल में लोग  मतदान  के लिए  वोटिंग  और मत के लिए  वोट  शब्द का प्रयोग सहजता से करते ह...

हिन्दुस्तान का दर्द फिर नए लक्ष्यों के साथ

हिन्दुस्तान का दर्द कुछ समय से समस्याओं से जूझ रहा था जिसकी वजह से काफी कुछ प्रभावित हुआ,हम हम आपके सामने फिर हाजिर है एक नए बदलाब के साथ आशा है आपको हमारा यह प्रयास पसंद आएगा... संजय सेन सागर  हिन्दुस्तान का दर्द फिर नए लक्ष्यों के साथ 

मुक्तिका: किस चरण का अनुकरण --संजीव 'सलिल'

मुक्तिका: किस चरण का अनुकरण संजीव 'सलिल' * किस चरण का अनुकरण जन-जन करे. हर चरण के आचरण हैं जब बुरे.. गले मिलते मुस्कुराते मीत कह पीठ पीछे हाथ में थामे छुरे.. हैं बुरे, बनते भले जो आजकल. हैं भले जो आजकल लगते बुरे.. मायके में गुजर कब किसकी हुई? खोज प्रियतम को चलो अब सासरे.. सच कहो तो मानते सब गैर हैं. कहें मनचाही वही हैं खास रे.. बढ़ी है सुविधाएँ, वैभव, कीर्ति, धन. पर आधार से गुम गया है हास रे.. साँस तेरा साथ चाहे छोड़ दे. 'सलिल' जीते जी न तजना आस रे.. ************************** दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम

दी हुई नींद: ख़्वाब देखे कोई और

दी हुई नींद: ख़्वाब देखे कोई और : "मेरे साथ ही ख़त्म नहीं हो जायेगा सबका संसार मेरी यात्राओं से ख़त्म नहीं हो जाना है सबका सफ़र अगर अधूरी है मेरी कामनाएं तो हो सकता है तुममें..." सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

दी हुई नींद: उम्र

दी हुई नींद: उम्र : "अर्जित की जाती है कंजूस बनिए सी ख़र्च सूद में से टूट जाती है आईने की तरह अचानक कच्च से फूलहा परातों सी होती है उम्र रखे-रखे ही पड़ जाती ..." सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

दी हुई नींद: रिश्ता

दी हुई नींद: रिश्ता : "किसी भी समय दिख जाता है वह अलस्सुबह, दोपहर, सांझ या रात में उसके कंधे पर लदी होती है कुर्सियां, सिर पर मेज़, हाथ में छोटा स्टूल पीली मिट्टी ..." सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

नहीं रह सकता

नहीं रह सकता ईर्ष्या, छल,छद्म, कपट,धोखा, अहम्, जिद स्वार्थ, रहते जहां, चलती घातें-प्रतिघातें नहीं रह सकता जिन्दा प्रेम वहां.