Skip to main content

Posts

लो क सं घ र्ष !: समय की सबसे बड़ी गाली-1

मैं एक भारतीय हूँ और हर भारतीय की तरह मुझे कुछ मूल्य घुट्टी में मिले हैं। मसलन परम्परा, देश और देश की सेना पर गर्व करना। हालाँकि ये समझना मुश्किल है कि हमारी परम्परा क्या है और देश का मतलब टाटा, अम्बानी और मित्तल है या फिर जनता; जिसमें किसान भी हैं और दूर दराज के आदिवासी भी; इसमें क्या वाकई बेरोजगार भी शामिल होते हैं? पर छोड़िए ना मैं देश पर गर्व करता हूँ और मानता हूँ कि सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे जवान कठिन परिस्थितियों में मौत का सामना करते हैं। अब जबकि उन पर गर्व करना कर्तव्य ही नहीं धर्म भी है तो हर भारतीय की तरह मैं भी उन पर गर्व करना चाहता हूँ। पर क्यों मनोरमा की लाश आँखांे के सामने आ जाती है। क्यों वस्त्रहीन दौड़ती हुई महिलाओं की दर्द भरे गुस्से की चीख दिल को चीर देती है ‘‘आओ! गाड़ दो अपना तिरंगा हमारी छाती पर।‘’ मनोरमा, याद है ना आपको, जुलाई 2004 में उनकी लाश झाड़ियों में पड़ी मिली। सात दिनों पहले सेना के जवानों ने उन्हें आतंकियों का सहयोगी होने के संदेह में, बिना किसी लिखा-पढ़ी या वारन्ट के घर से अगवा कर लिया था। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर भयंकर शारीरिक यातना...

अगले जन्म मोहे बिटिया न कीजो

एनआरआई दुल्हों का संताप झेल रही लड़कियों का दर्द हम लड़कियां है, क्या यही हमारा गुनाह है? माता-पिता ने विदेश में सैटल करवाने के मकसद से हमारी शादी एनआरआई लड़कों से कर तो दी, लेकिन हम आज भी मायके में हैं। पति हमें छोड़कर विदेश जा चुके हैं। हमें न्याय की दरकार हैजाने-अनजाने एनआरआई लड़कों से विवाह हो गया। एनआरआई पति विवाह रचाने के बाद छोड़कर विदेश चले गए। अब हमारे पास मायके में रहकर न्याय के लिए चक्कर काटने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा। यह दर्द भरी दास्तां सुनाई एनआरआई युवकों की सताई 24 लड़कियों ने। सर्किट हाउस में मंगलवार को फफक-फफक कर रोते हुए लड़कियों ने कहा कि आखिर वे लड़कियां क्यों हैं? उन्हें अब किसी भी जन्म में लड़की नहीं बनना है। केस-1 कमलजीत कौर की मार्च-2002 में मक्खनलाल से विवाह हुआ और दो साल बाद वह फ्रांस चला गया। पांच साल बाद मक्खनलाल वापस लौटा तो 11 अगस्त को दूसरा विवाह रचा लिया। विवाह करवा कर वह फिर फ्रांस चला गया। अब कमलजीत कौर परिजनों के साथ थाना, पुलिस और अदालत के चक्कर काट रही है केस-2 लतारानी का विवाह अप्रैल-2009 में कपूरथला के अमरजीत के साथ हुआ। डेढ़ माह बाद अमरजीत...

नव गीत : चलो भूत से मिलकर आएँ... -संजीव 'सलिल'

नव गीत : संजीव 'सलिल' चलो भूत से मिलकर आएँ... * कल से कल के बीच आज है. शीश चढा, पग गिरा ताज है. कल का गढ़ है आज खंडहर. जड़ जीवन ज्यों भूतों का घर. हो चेतन घुँघरू खनकाएँ. चलो भूत से मिलकर आएँ... * जनगण-हित से बड़ा अहम् था. पल में माटी हुआ वहम था. रहे न राजा, नौकर-चाकर. शेष न जादू या जादूगर. पत्थर छप रह कथा सुनाएँ. चलो भूत से मिलकर आएँ... * जन-रंजन जब साध्य नहीं था. तन-रंजन आराध्य यहीं था. शासक-शासित में यदि अंतर. काल नाश का पढता मंतर. सबक भूत का हम पढ़ पाएँ. चलो भूत से मिलकर आएँ... *

लो क सं घ र्ष !: जेलों में सड़ने को अभिषप्त हैं मुस्लिम युवा-2

आतंकी घटनाओं के संबंध में विभिन्न जगहों से गिरफ्तार आरोपियों पर दर्ज मुकदमे नाम अहमदाबाद ै सूरत दिल्ली मुबंई जयपुर अन्य योग सदिक षेख 20 15 5 1 हैदराबाद कोलकाता 54 आरिफ बदर 20 15 5 1 41 मंसूर असगर 20 15 5 1 41 मो सैफ 20 15 5 5 45 मुफ्ती अबुल बषर 21 15 बेलगाम, हैदराबाद 40 ैं सैफुर रहमान 20 15 6 ...

लो क सं घ र्ष !: जेलों में सड़ने को अभिषप्त हैं मुस्लिम युवा-1

जेलों में सड़ने को अभिषप्त हैं मुस्लिम युवा आतंक के नाम पर व्यवस्था एक समुदाय विषेश्ज्ञ को प्रताड़ित करने के लिए कौन - कौन से तौर - तरीके अपना सकती है , वह हाल की कुछ घटनाओं से समझा जा सकता है। आतंकी घटनाओं के नाम पर पुलिस ने थोक के भाव मुस्लिम युवको की गिरफ्तारी की। पुलिस व सत्ता का यह उत्पीड़न यहीं नहीं रूका बल्कि एक सोची - समझी साजिष के तहत उन पर इतने केस लाद दिए गए ताकि वह जीवन भर जेल में सड़ने पर मजबूर हों। अगस्त 2009 में उर्दू मासिक पत्रिका अफकार - ए - मिल्ली में अबु जफर आदिल आजमी का एक महत्वपूर्ण लेख प्रकाषित हुआ। इसका अंग्रेजी अनुवाद मुमताज आलम फलाही ने किया। प्रस्तुत है उसका हिंदी रूपान्तरण - यह सच है कि अन्याय व दुहारे मापदंडों के साथ कोई भी समाज बहुत दिन तक नहीं चल सकता। दुर्भाग्य से भारत तेजी से इन्हीं मापदंडों की ओर बढ़ रहा है। आंतकवाद के मामले में मुस्लिम युवाओं की गिरफ्तारी व न्याय में पुलिस , प्रषासन व न्यायापालिका का द...

बाल दिवस

करते है बंदना हम॥ तुम दीप बनके दमको॥ करते है साधना हम॥ तुम फूल बन गामको॥ खुशिया हँसे तुम्हारी॥ तुम चाँद बन चमको॥ छूटे रहो शिखर को॥ तुम ज्ञान लेके निकलो॥ यही दुआ मेरी है ... तुम महान बन के ॥ निकलो॥

मेरे बच्चो भविष्य तुम्हारा॥

मेरे बच्चो भविष्य तुम्हारा॥ उजाले से भरा रहेगा॥ जलेगी ज्योति ज्ञान की॥ मुख मंडल खिला रहेगा॥ सच करोगे सपना॥ जो सजा के बैठे द्वारे॥ अब तेरे अधीन है वे॥ तुम उनके हो प्राण प्यारे॥ फूलो की खुशबू का॥ चमन मिला रहेगा॥