Skip to main content

लो क सं घ र्ष !:देश में नफरत की बात करने वालों के लिए सबक

एक बार फिर देश में अमनपसन्द नागरिकों ने फसाद फैलाने वालों को करारी शिकस्त दे दी और घृणा की राजनीति करने वालों को मुहब्बत का पैगाम देने के इरादे से बनाई गई शाहरूख खान की फिल्म ‘‘माई नेम इंज खान’’ के हक में अपार समर्थन देकर जनता ने करारा जवाब दे दिया है।
देश में भाषा, क्षेत्रवाद व धर्म के नाम पर अलगाववाद का विष घोलने वाले लोगों के लिए यह अवश्य सबक ही कहा जायेगा। पहले देश के अमन पसन्द नागरिक ऐसी शक्तियों के विरूद्ध खुलकर आने से परहेज करते थे इसी कारण मुट्ठीभर उपद्रवियों की बुज़दिलाना हरकतों को बल मिलता था और बेकुसूरों पर जुल्म होता था। सामाजिक प्रदूषण फैलता था परन्तु अब यह अच्छा संकेत माना जाना चाहिए कि अमन पसन्द लोग आतंक फैलाने वालों व देश को बांटने का काम करने वालों के विरूद्ध मोर्चा संभालने निकल रहे हैं।
इसमें मीडिया की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार मीडिया ने इस बार साथ मिलकर शिवसेना व महाराष्ट्र निर्माण सेना के विरूद्ध मोर्चाबन्दी की है वैसे ही यदि धार्मिक द्वेष फैलाने वालों के विरूद्ध भी मीडिया करती तो शायद बाबरी मस्जिद विध्वंस काण्ड के दोषियों को कोई महत्व ना मिलता और वह हीरो से जीरो बन जाते और ना ही 1993 में मुम्बई या वर्ष 2002 में गुजरात सम्प्रदायिक्ता की आग में इतने दिन जलता।
आज भी मीडिया और विशेष तौर पर हिन्दी व क्षेत्रीय भाषाओं का मीडिया एक धर्म व उसके अनुयाइयों के विरूद्ध दुष्प्रचार का छोटा सा बहाना कैश करना नहीं भूलता। साध्वी प्रज्ञा सिंह लेफ्टिनेन्ट कर्नल पुरोहित, दयानन्द पाण्डेय, समीर कुलकर्णी एवं पूर्व मेजर रमेश उपाध्याय की गतिविधियों पर मीडिया चुप्पी साधते दिखाई देता है और अफजल गुरू, आफताब अंसारी और अब शहजाद इत्यादि की आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने वाले पुलिसिया आरोपों की चर्चाएं प्रतिदिन इलेक्ट्रानिक चैनलों समाचार पत्रों के पन्नों पर होती हैं। मीडिया का यह दोहरा स्वरूप हिन्दुत्ववादी शक्तियों को अप्र्रत्याशित रूप से उत्साहवर्धन करता है।
इसी प्रकार दिल्ली की जामा मस्जिद के ईमाम अहमद बुखारी के एक बयान जो उन्होंने सरकारों को दहशतगर्द कहते हुए आजमगढ़ में दिया था पर मुकदमा चलाने की बात की जाती है तो वहीं बाल ठाकरे, प्रवीण तोगड़िया व अशोक सिंघल के देश की एकता को विखण्डित करते और संविधान की धज्जियाँ उड़ाते बयानों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही पर बगले झांकी जाती है।
यदि समाज के चारों स्तम्भ समाज हित, लोकहित व देश हित में काम करें और संकीर्ण विचार धारा के प्रदूषण में लिप्त होकर देश में आम जनमानस को बहकाने का काम न करें तो गिनती के भी समर्थक ऐसी घृणा की राजनीति करने वालों को मिलना मुश्किल हो जायेंगे।

-तारिक खान

Comments

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

जूजू के पीछे के रियल चेहरे

हिन्दुस्तान का दर्द आज आपको बताने जा रहा है उन कलाकारों के बारे में जिनके काम की बदोलत ''जूजू'' ने सभी के दिलों मे जगह बना ली है..तो जानिए इन कलाकारों के बारे में और आपको यह जानकारी कैसी लगी अपनी राय से अबगत जरुर कराएँ बहुत ही क्यूट, अलग, और मज़ेदार से दिखने वाले जूजू असल में इंसान ही हैं, बस उनको जूजू के कॉस्टयूम पहना दिए गए है। पर ये करना इतना आसान नहीं था, जिस तरह का कॉस्टयूम और एक्ट शूट किए जाने थे उनमे हर मुमकिन कला और रचनात्मकता का प्रयोग किया जाना था। जूजू के पीछे के असल कलाकार कौन है आइये जानते हैं - प्रार्थना सुनिए विज्ञापन- इस विज्ञापन दो जूजू एक पेड़ से लटके दिखाए गए हैं और नीचे एक खाई है। उनमे से एक गिर जाता है और दूसरा अपना फोन निकलकर एक प्रार्थना सुनाता है जिस से की उस के दोस्त की आत्मा को शांति मिल सके। इस विज्ञापन में हैं ये दो कलाकार- रोमिंग विज्ञापन- इस में एक जूजू अपनी गर्लफ्रेंड को खुश करने के लिए फ़ोन पर उससे बातें करता रहता है चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो। इस विज्ञापन में सबसे बड़ी चुनौती थी एफ्फिल टावर और पिरा...