Skip to main content

हमले की अंदरूनी जानकारी थी: रेफरी


लंदन। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ( आई सी सी) के मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड ने आरोप लगाया है कि 3 मार्च को लाहौर में श्रीलंकाई टीम और अंपायरों पर होने वाले आतंकवादी हमले की किसी को पहले से जानकारी थी इसीलिए पाकिस्तानी टीम की बस रोक कर रखी गई थी ताकि उन्हें खतरे से दूर रखा जा सके।

3 मार्च को लाहौर में गद्दाफी स्टॆडियम के पास श्रीलंकाई क्रिकेट टीम की बस और उनके साथ चल रही अंपायरों की बस पर आतंकवादी हमला किया गया था। हमले में कई श्रीलंकाई खिलाड़ी घायल हुए थे। अंपायरों की बस का चालक और एक अधिकारी गोलीबारी में मारा गया था जबकि पाकिस्तानी अंपायर अहसान रजा बुरी तरह घायल हुए थे। क्रिस ब्रॉड को भी चोट आई थी लेकिन वे सुरक्षित बच गए थे।

ब्रिटिश नागरिक ब्रॉड ने अपने देश वापस पहुंचने के बाद कल एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि हमले के पीछे किसी षड्यंत्र होने का उनके पास कोई सबूत नहीं है लेकिन उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि पाकिस्तानी टीम की बस, श्रीलंकाई खिलाड़ियों की बस रवाना होने के पांच मिनट बाद क्यों रवाना की गई।

ब्रॉड ने कहा, यद्यपि पिछले मैच में दोनों टीमें अलग-अलग समय पर यात्रा करती थीं लेकिन लाहौर टेस्ट के पहले दोनों दिन दोनों टीमें एक साथ स्टेडियम के लिए रवाना हुई थीं। हमला मैच के तीसरे दिन हुआ जिस दिन पाकिस्तानी टीम, श्रीलंकाई टीम के साथ नहीं गई।

“पहले दोनों दिन दोनों बसें एक साथ सुरक्षा काफिले के साथ रवाना हुई थीं। लेकिन इस खास दिन पाकिस्तान की बस श्रीलंका की बस से पांच मिनट बाद रवाना की गई। क्यों?” ब्रॉड ने सवाल उठाया।
“मैंने सोचा शायद वे होटल में 5-10 मिनट और रुकेंगे और उसके बाद आएंगे लेकिन यह सब होने के बाद आपका दिमाग सोचने लगता है कि क्या किसी को कुछ पहले से पता था और उन्होंने पाकिस्तानी बस पीछे रुकवा दी थी?” ब्रॉड ने कहा।

ब्रॉड ने इसके पहले आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी पुलिसवाले उन्हें गोलीबारी के बीच असहाय छोड़ कर भाग गए थे।

हालांकि पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड ने उनके इस आरोप पर गुस्सा जाहिर किया था लेकिन ब्रॉड ने फिर एक बार कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा व्यवस्था बहुत ढीली थी और उसमें खामियां थीं।

“होटल से लेकर जहां हम पर हमला हुआ वहां तक और उसके आगे मैदान तक हर जगह ट्रैफिक पुलिसवाले वर्दी में और बंदूकें लेकर ट्रैफिक नियंत्रण कर रहे थे।“ ब्रॉड ने कहा- “फिर आतंकवादी चौराहे पर कैसे आ गए और उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी और ये लोग कुछ नहीं कर पाए?”

“वहां पर बहुत से पुलिसवाले थे और फिर भी ये आतंकवादी आ पहुंचे, अपना काम किया और फिर चले गए। यह मेरी समझ से जरा बाहर है” ब्रॉड ने कहा। लंका के स्पिन गेंदबाज मुरलीधरन ने भी ब्रॉड के कथन का समर्थन किया है।

मुरली ने ऑस्ट्रेलिया के रेडियो 5एए से कहा कि “पता नहीं क्यों उस दिन बस में बंदूकधारी पुलिसवाले नहीं थे। अगर उस दिन कोई हथियार लिए साथ होता तो हमारे पास खुद की रक्षा करने का साधन होता।”

मुरली ने कहा कि आम तौर पर दोनों बसें साथ जाती थीं और उनके साथ 4-5 रक्षा वाहन होते थे। “हम सुबह 8.30 पर निकले और यूनुस खान ( पाकिस्तानी कप्तान) 8.35 पर। हम दो समूहों में बंट गए। शायद उन्हें जानकारी थी कि (जाने का) सही समय क्या होगा।”

ब्रॉड इंग्लैण्ड के पूर्व खिलाड़ी हैं और श्रीलंका तथा पाकिस्तान एक बीच मैचों के लिए रेफरी का कार्य कर रहे थे। उन्हें चोट तो नहीं आई लेकिन उन्होंने कहा कि पुलिसवाले बस छोड़ कर भाग गए थे।

“कहीं भी किसी पुलिसवाले का नामो-निशान नहीं था। ब्रॉड ने कहा। “जाहिर है वे घटनास्थल से भाग चुके थे और हमें गोलियों का निशाना बनने के लिए छोड़ गए थे।”

ब्रॉड, अहसान रजा के साथ बैठे थे। रजा को एक गोली लगी थी और वे अब भी गंभीर हालत में अस्पताल में हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अंपायर साइमन टॉफेल और स्टीव डेविस भी इसी बस में थे और उन दोनों ने भी सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना की है।

ब्रॉड ने हमले के टेलीविजन दृश्यों का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी बस को बिना सुरक्षा के अकेला छोड़ दिया गया था। ब्रॉड की बस का ड्राइवर हमले में मारा गया था। “आप साफ देख सकते हैं कि हमारी वैन एम्बुलेंस के बाजू में सड़क के बीचों-बीच खड़ी है, आतंकवादी हमारी वैन के चारों तरफ और वैन पर गोलियां चला रहे हैं और एक पुलिसवाला तक कहीं नजर नहीं आ रहा।” ब्रॉड ने कहा- “आप साफ देख सकते हैं कि वे भाग गए थे, घटनास्थल से निकल भागे थे।”

ब्रॉड ने कहा “मैं पाकिस्तानी सुरक्षा व्यवस्था ने बहुत, बहुत गुस्सा हूं। यह हमारी तेज किस्मत थी कि हम आज यहां हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा व्यवस्था से सवाल पूछे जाने की जरूरत है। हमें सुरक्षा दिए जाने का वादा किया गया था। लेकिन जब हमें सुरक्षा की जरूरत पड़ी तो यह कहीं नहीं थी।” आगे पढ़ें के आगे यहाँ

Comments

  1. निश्चित बात है की पाक को हमले की जानकारी थी
    उसकी नौटंकी अब जायदा दिन नहीं चलेगी

    ReplyDelete

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

Popular posts from this blog

ग़ज़ल

गज़ब का हुस्नो शबाब देखा ज़मीन पर माहताब देखा खिजां रसीदा चमन में अक्सर खिला-खिला सा गुलाब देखा किसी के रुख पर परीशान गेसू किसी के रुख पर नकाब देखा वो आए मिलने यकीन कर लूँ की मेरी आँखों ने खवाब देखा न देखू रोजे हिसाब या रब ज़मीन पर जितना अजाब देखा मिलेगा इन्साफ कैसे " अलीम" सदकतों पर नकाब देखा

डॉ.प्रभुनाथ सिंह भोजपुरी के अनन्य वक्ता थे -केदारनाथ सिंह

डॉ.प्रभुनाथ सिंह के स्वर्गवास का समाचार मुझे अभी चार घंटा पहले प्रख्यात कवि डॉ.केदारनाथ सिंह से मिला। वे हावड़ा में अपनी बहन के यहां आये हुए हैं। उन्हीं से जाना भोजपुरी में उनके अनन्य योगदान के सम्बंध में। गत बीस सालों से वे अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन नाम की संस्था चला रहे थे जिसके अधिवेशन में भोजपुरी को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव पारित हुआ था तथा उसी की पहल पर यह प्रस्ताव संसद में रखा गया और उस पर सहमति भी बन गयी है तथा सिद्धांत रूप में इस प्रस्ताव को स्वीकार भी कर लिया गया है। केदार जी ने बताया कि डॉ.प्रभुनाथ सिंह का भोजपुरी में निबंध संग्रह प्रकाशित हुआ है और कविताएं भी उन्होंने लिखी हैं हालांकि उनका संग्रह नहीं आया है। कुछ कविताएं अच्छी हैं। केदार जी के अनुसार भोजपुरी के प्रति ऐसा समर्पित व्यक्ति और भोजपुरी के एक बड़े वक्ता थे। संभवतः अपने समय के भोजपुरी के सबसे बड़े वक्ता थे। बिहार में महाविद्यालयों को अंगीकृत कालेज की मान्यता दी गयी तो उसमें डॉ.प्रभुनाथ सिंह की बड़ी भूमिका थी। वे उस समय बिहार सरकार में वित्तमंत्री थे। मृत्यु के एक घंटे पहले ही उनसे फोन से बातें हुई ...