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लो क सं घ र्ष !: अतिवाद की लड़ाई - 1

कुछ दिन पहले ही हम सब दण्डकारण्य घूम कर लौटे हैं, अरुंधती रॉय के साथ, भूमकाल में कॉमरेडों के साथ-साथ घूमते हुए. दण्डकारण्य के ग्राम स्वराज्य को देखते हुए, आउटलुक, समयांतर और फिलहाल, पत्रिकाओं के पन्ने पलटते हुए. भारत सरकार के असुरक्षा की महसूसियत को खारिज होती जा रही थी, जंगलों में चलते हुए, पहाड़ों पर चढ़ते हुए. हमे ऐसा ही लग रहा था कि जमीन पर पेड़ों से टूटकर गिरे सूखे पत्ते हमारे ही पैरों के नीचे दब रहे हैं और उनकी चरमराहट हमारे कानों में किसी संगीत की तरह बज रही है. संगीत, जिसे भारत सरकार और उसकी दलाली करने वाली कार्पोरेट मीडिया भय के रूप में हमारे जेहन में भरते रहने का लगातार प्रयास करती रहती है. इंद्रावती नदी के पार जो “पाकिस्तान” है (पुलिस की भाषा में) वहाँ के किस्से सी.वेनेजा, रुचिरगर्ग और कई पत्रकार पहले भी ला चुके हैं. जब हम आजादी की बात करते हैं तो उसके क्या मायने होते हैं? अरुंधती इस अवधारणा को ही एक वाक्य में ही बताती हैं “वहाँ मुक्ति का मतलब असली आजादी था”, वे उसे छू सकते थे, चख सकते थे, इसका मतलब भारत की स्वतंत्रता से कहीं ज्यादा था. यह नकली आजादी को पेपर्द करने वाला वाक्य ...

दूरदर्शन को सोखकर रसूखदार हुए रजत

एक टीवी चैनल स्थापित करने में करोडों रुपए लगते हैं और उसे चलाने में और करोड़ों रुपए हर साल। दिल्ली में एक ऐसा टीवी चैनल है जिनके मालिक कश्मीरी गेट के एक अपेक्षाकृत गरीब परिवार में पैदा हुए थे. वे जिस घर में पैदा हुए थे उसमें एक कमरे में दर्जनों लोग सोते थे। लेकिन आज वही आदमी एक न्यूज चैनल का मालिक है. बात इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा की हो रही है। रजत शर्मा को जिंदगी में पत्रकारिता का ब्रेक जल्दी मिला। वे प्रभु चावला के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और दिल्ली विश्वविद्यालय के जमाने के साथी हैं और भले ही प्रभु चावला जैसा होने का इल्जाम उन पर नहीं लगाया जाता लेकिन साइकिल से आधुनिकम कारों और एक, भूत- प्रेत दिखाकर ही सही, सफल होने वाले टीवी चैनल की सफलता की कहानी के पीछे की कहानी आपको बतानी है। साल था सन 2000। सरकार अटल बिहारी वाजपेयी की थी और सूचना और प्रसारण मंत्री देश के जाने माने वकील और भाजपा के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक अरुण जेटली हुआ करते थे। रजत शर्मा जिन्होंने प्रेस इंन्फॉरमेशन ब्यूरो का कार्ड लेने के लिए ग्वालियर के एक अखबार दैनिक स्वदेश से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लिया थ...

चिट्ठाजगति संस्‍कृतप्रशिक्षणं प्रारभ्यते ।। भवन्‍त: अपि लाभ: स्‍वीकुर्यु: ।।

।। हिन्‍दी भाषायां पठितुम् अत्र बलाघात: करणीय: ।। मम सुहृद् मित्राणि गत दिवसेषु अहं संस्‍कृतभाषाया: प्रसाराय संस्‍कृतप्रशिक्षणं दातुं मम अस्‍य नूतन जालपुटस्‍य निर्माणं कृतवान् चिन्तितवान् आसम् यत् जनानां रूचि: वर्धिष्‍यते अथ च सम्‍भवत: जना: संस्‍कृतं बोधितुम् अपि इच्‍छाप्रकटनं करिष्‍यन्ति । किन्‍तु संस्‍कृतं ज्ञातुं तु इच्‍छा नैव दृष्‍ट: अपितु पठितुमपि रूचि: न दृष्‍यते। अयि भो: पाठनं तु नास्ति एव, अहं चिन्‍तयामि यत् अत्र जनानां सम्‍भवत: आगमनम् अपि नैव भवति । एकदा तु चिन्‍तने आगत: यत् केवलं संस्‍कृते लेखनं एव चलेत्। यतोहि प्रशिक्षणाय तु न्‍यूनाति न्‍यूनं दश-पंचदश जना: तु भवेयु: एव ।। किन्‍तु मम एतस्‍य विचारस्‍योपरि मम केचन् भ्रात्रृणां प्रेम बलीयसी अभवत् ।। मम अस्‍य जालपुटस्‍योपरि आगमनं न्‍यूनजनानाम् एव भवतु किन्‍तु ते सन्ति संस्कृतानुरागिण: ।   तेषां श्रद्धा अपि अद्भुता एव । अत: अहं तेषां कृते एव संस्‍कृतप्रशिक्षणस्‍य प्रारम्‍भ: करोमि । अग्रिम लेखत: संस्‍कृतस्‍य प्रशिक्षणं प्रारभ्यते। भवन्‍त: सादरम् आमन्त्रिता: सन्ति। भवतां संस्कृतश्रद्धा चिरकालपर्यन्‍तं यथावत् तिष्‍ठेत् , इति मे श...

लो क सं घ र्ष !: बटाला हाउस इन्काउन्टर - 2

मोहम्मद आतिफ अमीन को लगभग सारी गोलियाँ पीछे से लगी है। 8 गोलियाँ पीठ में लग कर सीने से निकली हैं। एक गोली दाहिने हाथ पर पीछे से बाहर की ओर से लगी है जबकि एक गोली बाँईं जाँघ पर लगी हैं और यह गोली हैरत अंगेज तौर पर ऊपर की ओर जाकर बाएँ कूल्हे के पास निकली है। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सम्बंध में प्रकाशित समाचारों और उठाये जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह तर्क दिया कि आतिफ गोलियाँ चलाते हुए भागने का प्रयास कर रहा था और उसे मालूम नहीं था कि फ्लैट में कुल कितने लोग हंै इसलिए क्रास फायरिंग में उसे पीछे से गोलियाँ लगीं लेकिन इन्काउन्टर या क्रास फायरिंग में कोई गोली जाँघ में लगकर कूल्हे की ओर कैसे निकल सकती है। आतिफ के दाहिने पैर के घुटने में 1 .5 x 1 सेमी0 का जो घाव है उस के बारे में पुलिस का कहना है कि वह गोली चलाते हुए गिर गया था। पीठ में गोलियाँ लगने से घुटने के बल गिरना तो समझ में आ सकता है किन्तु विशेषज्ञ इस बात पर हैरान है कि फिर आतिफ के पीठ की खाल इतनी बुरी तर कैसे उधड़ गई? पोस्मार्टम रिपोर्ट के अनुसार आतिफ के दाहिने कूल्हे पर 6 से 7 सेमी0 के भीतर कई जगह रगड़ के निशानात भी प...

आदरणीय पाबला जी

आज लम्बे समय के बाद मेल खोली तो खाते को खोले जाने की सूचना मिली! आदरणीय पाबला जी क्या इस बारे कुछ पता चल सकता है! सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

फ़ोकट में मुशिवत आयी..

रात में अचानक करवट बदलते समय नींद टूट गयी, तो मै अपने आप को किसी नदी के किनारे सोता हुआ मह्शूश किया। मै आवाक रह गया की ये सब कैसे हुआ । थोड़ा असमंजस में पड़ने के बाद हमें ध्यान आया की मै तो ग्वालियर से बनारस aअ रहा था हमारे बगल में एक सुन्दर स्कूल की छात्रा बैठी थी। जो की हमें बतायी थी की मै गवालियर में बुआ के यहाँ से आ रही हूँ। और मै बी। ऐ में पद्धति हूँ। अब हमारा सफ़र शुरू हुआ बात चीत कम हो रही थी। और गाडी अपनी रफ़्तार में चल रही थी जब सुबह हुयी जो वह कोमल कन्या ने बोला आप जाओ पहले फ्रेश हो के आ जाओ तो मै जाऊ मै गया फ्रेश हुआ और आया तो वह बोली आने वाले स्टेशन पर गाडी रुकेगी आप अखवार ले आना जल्द ही स्टेशन आया मै अखवार लेने नीचे गया और अखबार लेके जल्द ही वापस आया तो उसने दो काफी लेके शीत पर बैठी मेरा इन्तजार कर रही थी॥ हम दोनों ने काफी अखवार दोनों साथ साथ पढ़ते और पीते थे॥ अब हमारे दोनों में हँसी मज़ाक का दौर शुरू हुआ था॥ हम दोनों आशिक मिजाज के थे लेकिन वह लड़की बिलकुल अप्सरा थी ॥ मै भी अपने स्मार्ट रूख में थे। हम लोगो ने अपना मोबाइल नुम्बर लिया और दिया ॥ पता नहीं क्या होने लगा हम लोग ए...

प्रस्‍तुतोमि तद्दृष्‍यं यद्दृष्‍ट्वा सर्वेभारतीया: प्रसन्‍तामनुभवेयु: ।।

हिन्‍दी भाषायां पठितुम् अत्र बलाघात: करणीय:                   प्रस्‍तुतोमि तत् दृष्‍यं यद्दृष्‍ट्वा सर्वे भारतीया: प्रसन्‍नतामनुभविष्‍यन्ति । भवन्‍त: चिन्‍तयन् सन्ति यत् तावत अहं किं दर्शयितुम् इच्‍छामि ।  स्‍वयमेव पश्‍यन्‍तु । अस्ति एतत् दृष्‍यं लखनउनगरस्‍य, निरालानगरक्षेत्रस्‍य शिशुमन्दिरे आयोजितस्‍य 10 दिवसीयसंस्‍कृतआवासीयप्रशिक्षणशिविररस्‍य , यत्र सम्‍भवत: 250 प्रशिक्षार्थय: 10 दिवसपर्यन्‍तं  संस्‍कृतसम्‍भाषणस्‍य शिक्षां गृहीतवन्‍त:।    शिविरआयोजनस्‍य नवमे दिने नगरभ्रमणम् आयोजितम् , सरस्‍वतीशिशुमन्दिरत: श्रीरामकृष्‍णमठम् । वदतु संस्‍कृतम्, जयतु भारतम् । जयतु जयतु संस्कृत भाषा, वदतु वदतु संस्‍कृतभाषा । ग्रामे ग्रामे नगरे नगरे संस्कृत भाषा इति उद्घोषात् सम्‍पूर्ण विश्‍व जनु गुंजायमान: आसीत् ।  शिविरायोजनस्‍य दशमे दिने प्रात: 3वादने भारतमातु:  मानचित्रे सर्वे छात्रा: शिक्षका: च पुष्‍पार्पणं कृतवन्‍त: । भारतमातु: मानचित्रं  दीपै: सज्जितं कृतम् ।  भवन्‍त: अस्मिन्  चित्रे भारतमातु: पवित्रविग्रह: द्रष्‍टुं शक्‍नुवन्ति । सार्धं भोजनं कुर्वन्‍त: छात्रा:। अनेन प्रका...